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मानकुंडू मानसिक अस्पताल में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित

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मानकुंडू मानसिक अस्पताल में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित


हुगली, 06 अगस्त (हि. स.)। जिले के मानकुंडू मानसिक अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर जांच शुरू हो गई है। अस्पताल का नाम बदलकर “आनंद आश्रम” किए जाने के बाद भी यहां कई तरह की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। मामले की जांच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है।

हावड़ा-बैंडेल मुख्य रेल मार्ग के पश्चिमी किनारे स्थित मानकुंडू मानसिक अस्पताल की स्थापना वर्ष 1939 में प्रसिद्ध चिकित्सक हरनाथ बसु ने करीब 22 बीघा जमीन पर की थी। मानसिक रोगियों के उपचार के उद्देश्य से शुरू हुआ यह अस्पताल एक समय बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था और लंबे समय तक केवल बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवा ही चल रही थी।

बाद में सरकारी सहायता से पुराने भवनों का जीर्णोद्धार किया गया और नई सुविधाएं विकसित की गईं। यहां 60 शैय्या वाला तीन मंजिला भवन भी बनाया गया। पूर्व विधायक इंद्रनील सेन ने अपने विधायक निधि से 40 लाख रुपये देने की बात भी सामने आई है। यह अस्पताल ट्रस्ट के माध्यम से संचालित होता है और भद्रेश्वर नगरपालिका के वार्ड नंबर-1 स्थित खां रोड के पास है। वर्ष 2011 में भद्रेश्वर नगरपालिका ने इसके संचालन की जिम्मेदारी संभाली थी।

हाल ही में अस्पताल के कर्मचारियों ने वेतन में देरी की शिकायत की है। स्वास्थ्यकर्मियों का दावा है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है।

शिकायत मिलने के बाद गुरुवार को चंदननगर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक दीपांजन गुहा, भद्रेश्वर नगरपालिका के प्रशासक और चंदननगर के महकमा अधिकारी के साथ अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

विधायक ने आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें अस्पताल की जमीन पर बने सौ से अधिक दुकानों का मामला भी शामिल है। आरोप है कि दुकानों के लिए लोगों से पैसे लिए गए, लेकिन कई लोगों को अब तक दुकानें नहीं मिली हैं। कुछ लोगों ने 80 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक भुगतान करने का दावा किया है।

इसके अलावा अस्पताल परिसर के तालाब, पेड़, साइकिल स्टैंड और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।

विधायक दीपांजन गुहा ने कहा कि देश के दूसरे सबसे पुराने मानसिक अस्पताल में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि संस्थागत स्तर पर हुई कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले चरण में कर्मचारियों के वेतन की समस्या का समाधान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अस्पताल में बिजली बैकअप, सीसीटीवी कैमरे और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। वर्ष 2022 के बाद हुई सभी नियुक्तियों और आय-व्यय का ऑडिट कराने की बात भी कही गई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का लाइसेंस रद्द न हो, इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

चंदननगर के महकमा अधिकारी ने कहा कि अस्पताल में कई मरीज भर्ती हैं, इसलिए उनकी चिकित्सा व्यवस्था में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अवैध निर्माण और अन्य शिकायतों की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई जा रही है, जो पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देगी।

अस्पताल की नर्सिंग स्टाफ कृष्णा चक्रवर्ती ने कहा कि मई महीने से वेतन नहीं मिला है और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या भी कम है, खासकर जीएनएम नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण परेशानी हो रही है।

वहीं, स्थानीय निवासी कपिल देव शर्मा ने आरोप लगाया कि दुकान देने के नाम पर उनसे दो लाख रुपये लिए गए, लेकिन उन्हें दुकान नहीं मिली।

स्थानीय निवासी लक्ष्मी दुले ने भी 80 हजार रुपये देने के बावजूद दुकान नहीं मिलने का दावा किया। स्थानीय निवासी सुशील कुंडू और अरविंद दुले ने भी दुकान आवंटन को लेकर इसी तरह की शिकायतें सामने रखीं।

प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद स्पष्ट होगा कि कहां-कहां नियमों का उल्लंघन हुआ है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय