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दार्जिलिंग में अनित थापा के इस्तीफे के बाद जीटीए में सामूहिक त्यागपत्रों की बाढ़

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दार्जिलिंग में अनित थापा के इस्तीफे के बाद जीटीए में सामूहिक त्यागपत्रों की बाढ़


दार्जिलिंग, 18 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुई राजनीतिक अस्थिरता अब दार्जिलिंग पहाड़ में गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) प्रमुख अनित थापा के बुधवार इस्तीफे के बाद गुरुवार को हालात और बिगड़ गया, जब प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे से एक के बाद एक नेताओं ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया। अनित थापा के फैसले के बाद जीटीए के सभासदों से लेकर पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों तक, बड़े पैमाने पर इस्तीफे सामने आ रहे है। इससे पहाड़ में अभूतपूर्व राजनीतिक शून्यता की स्थिति बन गई है।

दार्जिलिंग सदर एक के अध्यक्ष और युवा शक्ति केंद्रीय कमेटी के नेता अमृत येमजोन ने अनित थापा के निर्णय को समयानुकूल बताते हुए कहा कि यह संगठन के हित में लिया गया एक साहसिक कदम है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से निराश न होने की अपील करते हुए कहा कि यह अंत नहीं, बल्कि एक नई रणनीतिक शुरुआत है।

वहीं, जीटीए के उप-प्रधान कार्यपालक सांचबीर सुब्बा ने भी अपने पद और सभासद पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के लोगों ने विधानसभा चुनाव में बदलाव की इच्छा जताई है। जीटीए उस राह में बाधा न बने, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है। साथ ही उन्होंने जीटीए पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस्तीफों की यह लहर कालिम्पोंग और कर्सियांग उपमंडलों तक पहुंच गई है।

कालिम्पोंग एक पंचायत समिति की अध्यक्ष ममता गुरुंग ने भी अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि वह पहाड़ के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं के लिए प्रतिबद्ध रहेंगी।

कर्सियांग के चिमनी देउराली क्षेत्र के सभासद श्याम शेरपा और सोनादा पचेंग क्षेत्र के सभासद अनोस थापा ने भी अपने पदों से इस्तीफा दिया। इसके अलावा प्रमोस्कर ब्लोन और रीलिंग काइज़ले क्षेत्र के कार्यपालक सभासद सतीश पोखरेल ने भी पद छोड़ते हुए बताया कि अब वे भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के सामान्य सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सामूहिक इस्तीफे पहाड़ की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे है। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के बढ़ते प्रभाव और जीटीए को निष्क्रिय करने के दबाव को इस स्थिति का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

वहीं, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के प्रवक्ता वाई लामा ने इन इस्तीफों का स्वागत करते हुए कहा कि केवल पूर्व सत्ताधारी ही नहीं, बल्कि विपक्ष और निर्दलीय सदस्यों को भी इस्तीफा देना चाहिए, ताकि राज्य और केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश जा सके। फिलहाल दार्जिलिंग पहाड़ में राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल है।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार