ऐतिहासिक 'बोल्ला रक्षाकाली पूजा' की तैयारियां शुरू, 27 नवंबर को होगा मुख्य पूजन और भव्य मेला
दक्षिण दिनाजपुर, 23 अक्टूबर (हि. स.)। जिले की ऐतिहासिक और उत्तर बंगाल की लोक-संस्कृति के प्रमुख केंद्र मानी जाने वाली 'बोल्ला रक्षाकाली पूजा' की तैयारियां आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी हैं। परंपरा के अनुसार, विजयादशमी के बाद पड़ने वाले पहले शुक्रवार सुबह मंदिर परिसर के पास स्थित जलाशय से देवी की पवित्र प्रतिमा का ढांचा (काठामो) निकाला गया।
इसके बाद दूध से पवित्र ढांचे का अभिषेक कर विशेष पूजा का आयोजन किया गया। पूजा में देवी मां को महाभोग के रूप में 'छप्पन भोग' अर्पित किया गया।
ढांचा पूजा (काठामो पूजा) को लेकर गुरुवार रात से ही मंदिर परिसर से लेकर स्नान घाट तक के पूरे रास्ते को आकर्षक फूलों से सजाया गया था। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होते ही पूरे इलाके में उत्सव का माहौल बन गया है।
लोक मान्यताओं के अनुसार, देवी रक्षाकाली की मुख्य पूजा रास पूर्णिमा के ठीक बाद आने वाले शुक्रवार को होती है। इस बार 27 नवंबर को मां महामाया की मुख्य पूजा और चार दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होगा।उत्तर बंगाल के सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल बोल्ला मेले में हर साल न केवल पश्चिम बंगाल और भारत के अन्य राज्यों से, बल्कि पड़ोसी देशों— बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
चार दिनों तक चलने वाले इस विशाल धार्मिक महोत्सव और मेले को शांतिपूर्ण व सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पूजा समिति के संयुक्त तत्वावधान में व्यापक कार्य योजना बनाई जा रही है। 27 नवंबर को होने वाले इस महापर्व को लेकर पूरे उत्तर बंगाल में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

