आलू की खेती में भारी नुकसान, किसानों ने मुख्यमंत्री से मांगा विशेष आर्थिक पैकेज
हुगली, 03 नवंबर (हि. स.)। आलू की खेती में लगातार हो रहे नुकसान और कोल्ड स्टोरेज के बढ़ते खर्च से हुगली जिले के किसान और आलू कारोबारी परेशान हैं। उत्पादन, पैकेजिंग और भंडारण सहित एक बोरी आलू पर करीब 380 रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि बिक्री महज 100 से 110 रुपये प्रति बोरी हो रही है। इस तरह किसानों को प्रति बोरी करीब 280 से 290 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए किसानों और व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है।
किसानों और व्यापारियों के अनुसार, इस वर्ष एक बोरी आलू के उत्पादन पर करीब 300 रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा पैकेजिंग के लिए बोरी खरीदने पर 40 रुपये, आलू की छंटाई और बोरी में भरने के लिए मजदूरी पर 20 रुपये तथा खेत से कोल्ड स्टोरेज तक पहुंचाने के लिए परिवहन पर 30 रुपये खर्च हो रहे हैं। इस तरह कुल लागत करीब 380 रुपये प्रति बोरी पहुंच रही है।
इसके मुकाबले किसानों को कोल्ड स्टोरेज में आलू की कीमत 100 से 110 रुपये प्रति बोरी मिल रही है। कुछ जगहों पर अधिकतम 130 से 140 रुपये तक भाव मिलने के बावजूद लागत निकालना मुश्किल है। किसानों का कहना है कि सभी खर्चों के बाद उनके हाथ में बेहद कम रकम बच रही है।
हुगली जिला प्रगतिशील आलू व्यापारी समिति के अध्यक्ष सहित कई किसानों और कारोबारियों ने बताया कि खाद, बीज, कीटनाशक और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके साथ बिजली बिल, बोरी की कीमत, मजदूरी और कोल्ड स्टोरेज का किराया भी किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। लगातार नुकसान के कारण अब आलू की खेती जारी रख पाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
किसानों और व्यापारियों ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कृषि अधिकारी खेतों में पहुंचकर खेती की स्थिति का जायजा नहीं लेते। कई ब्लॉकों में मिट्टी की जांच के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। किसानों को यह जानकारी भी नहीं मिल पाती कि उनकी जमीन के अनुसार कितनी मात्रा में खाद, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश की जरूरत है। उन्होंने कृषि विभाग से बेहतर निगरानी और वैज्ञानिक सलाह की व्यवस्था करने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि आलू की खेती को बचाने के लिए उत्पादन, भंडारण और विपणन—तीनों स्तरों पर सरकार को योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा। पहले से तय होना चाहिए कि कितने आलू का उत्पादन होगा, उसका भंडारण कहां और कैसे होगा तथा किसानों को बाजार में उचित कीमत कैसे मिलेगी।
इस बीच, पांच नवंबर को हुगली के पुरशुड़ा में मुख्यमंत्री की प्रस्तावित सरकारी सभा से किसानों और व्यापारियों को विशेष उम्मीदें हैं। गोघाट के विधायक प्रशांत दिगार, जो स्वयं आलू कारोबार से जुड़े हैं और आरामबाग सांगठनिक जिला भाजपा के अध्यक्ष भी हैं, ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने गड़वेता की सभा में कहा था कि पांच नवंबर को पुरशुड़ा की सरकारी सभा से किसानों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाएगी।
किसानों और व्यापारियों ने मुख्यमंत्री के सामने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं। पहली, खाद और कीटनाशकों की कीमतों में कमी की जाए। दूसरी, प्रत्येक ब्लॉक में मिट्टी जांच केंद्र स्थापित कर जमीन के अनुसार किसानों को उचित सलाह दी जाए। तीसरी, बिजली बिल और कोल्ड स्टोरेज का किराया कम किया जाए। जरूरत पड़ने पर सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाए।
अब सभी की निगाहें पांच नवंबर को पुरशुड़ा में होने वाली मुख्यमंत्री की सभा पर टिकी हैं। किसानों और आलू कारोबारियों को उम्मीद है कि इस सभा में उनकी आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए विशेष पैकेज और राहत उपायों की घोषणा होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

