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अभिषेक बनर्जी पर हमले के आरोपों को दिलीप घोष ने किया खारिज, जन्मदिन आयोजन पर कसा तंज

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अभिषेक बनर्जी पर हमले के आरोपों को दिलीप घोष ने किया खारिज, जन्मदिन आयोजन पर कसा तंज


कोलकाता, 07 नवंबर (हि.स.)। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमले की कोशिश के आरोपों को पश्चिम बंगाल के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने खारिज कर दिया है। शनिवार को कोलकाता के इको पार्क में सुबह की सैर के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन आयोजन को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े नेता को फुटपाथ पर जन्मदिन मनाने के बजाय किसी बड़े होटल में आयोजन करना चाहिए था। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि वहां ईंट-पत्थर फेंकने के बजाय मिठाइयां फेंकी जानी चाहिए थीं।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार रात अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन के अवसर पर कालीघाट रोड स्थित उनके आवास के सामने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता और समर्थक एकत्रित हुए थे। इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के भी वहां पहुंचने का आरोप लगा। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी और जवाबी नारेबाजी के बाद विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हाथापाई तक पहुंच गया। इसके बाद अभिषेक बनर्जी भी अपने आवास से बाहर आए थे।

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग उन्हें मारने के इरादे से आग्नेयास्त्र लेकर पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके समर्थकों ने आरोपितों को मौके पर पकड़ लिया।

शनिवार को इको पार्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिलीप घोष ने इन आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इतने बड़े नेता को अपना जन्मदिन किसी बड़े होटल में आयोजित करना चाहिए था। फुटपाथ पर आयोजन करने के कारण ही शायद इस तरह की प्रतिक्रिया हुई।

हत्या की कोशिश संबंधी अभिषेक बनर्जी के दावे पर दिलीप घोष ने कहा कि इस तरह की बातें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी करती रही हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है, तब वह इस तरह की भावनात्मक बातें करता है।

इस दौरान दिलीप घोष ने वामपंथी दलों पर भी निशाना साधा। दुर्गापूजा के दौरान स्टॉल में तोड़फोड़ के आरोपों के विरोध में वामपंथी कार्यकर्ताओं की ओर से घर-घर जाकर पुस्तकें पढ़ने का संदेश देने के अभियान पर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया, वे अब लोगों को पुस्तकें पढ़ने की सलाह दे रहे हैं। यह हास्यास्पद है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर वामपंथी दलों की पुस्तकें कौन पढ़ेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता