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बदरीनाथ धाम में अधूरे निर्माण कार्याें काे लेकर कांग्रेस विधायक ने सरकार काे कठघरे में किया खड़ा

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बदरीनाथ धाम में अधूरे निर्माण कार्याें काे लेकर कांग्रेस विधायक ने सरकार काे कठघरे में किया खड़ा


अलकनंदा नदी की धारा का प्रवाह मुड़ने से मंदिर के लिए हाे सकता है खतरा: विधायक बुटाेला

देहरादून, 08 अप्रैल (हि.स.)। बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक लखपत सिंह बुटोला ने चारधाम यात्रा की तैयारियाें काे लेकर सरकार काे

कठघरे में खड़ा किया है। उन्हाेंने कहा कि यात्रा शुरू हाेने के कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन बदरीनाथ धाम में अभी कार्य पूरे नहीं हुए हैं। निर्माण कार्य के चलते अलकनंदा नदी का प्रवाह बदलने से मुख्य मंदिर सहित अन्य स्थलाें के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हाे गया है।

बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला बुधवार काे यहां पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधामों के कपाट खुलने जा रहे हैं। कांग्रेस विधायक बुटोला ने कहा कि वे 5 अप्रैल को बदरीनाथ धाम गये थे। चारधाम यात्रा शुरू होने में मात्र कुछ ही दिन शेष हैं, परन्तु प्राधिकरण के कराये जा रहे कार्य अभी भी अधूरे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काे सीधे पीएमओ के निगरानी होने के बावजूद कार्यों की गुणवत्ता एवं कार्य पूर्ण करने की समय सीमा में घोर लापरवाही देखने को मिली है। पहले ही दिन ही हजारों लोग श्रीनारायण के दर्शन के लिए आयेंगे, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक कार्य पूर्ण नहीं कराये हैं।

उन्होंने कहा कि बदरीनारायण धाम में हो रहे निर्माण कार्यों की वजह से अलकनन्दा नदी की धारा का प्रवाह ब्रह्मकपाल एवं तत्व कुंड की तरफ हो गया है। जिस कारण ब्रह्मकपाल, तप्त कुंड एवं बदरी नारायण मंदिर को गम्भीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। लगभग 1.5 किमी तक अलकनन्दा नदी की चौड़ाई तीन मीटर तक कम कर दी गई है। जिससे अलकनन्दा नदी का नैसर्गिक प्रवाह खत्म किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य एवं स्थानीय लोगों को भविष्य में खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्हाेंने कहा कि मास्टर प्लान में बद्रीनाथ प्राधिकरण ने बदरी नारायण मंदिर परिसर के चारों ओर की बसायत को तोड़कर खंडहर बना दिया हैं। काम की समय सीमा पूरी होने के बाद भी मन्दिर के चारों ओर सौन्दर्यीकरण नहीं हो पाया है। दर्शन के लिए जाने वाले पथ का निर्माण कार्य अभी तक आधा-अधूरा ही हो रखा है।

उन्हाेंने बताया कि देव डोली के पौराणिक रास्ते का निर्माण कार्य भी अभी तक प्रारम्भ ही नहीं हुआ है। बद्रीनारायण की पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पंचधाराओं का रखरखाव नहीं किया जा रहा है जिस कारण धाराओं का प्राकृतिक स्रोत खतरे की जद में आ गये हैं। विधायक ने कहा कि जब चारधाम यात्राओं को लेकर बैठकें आहूत की जाती हैं उसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि, क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित किया जाता रहा है तथा ऐसा न करने के कारण मूल समस्यायें रेखांकित एवं निस्तारित नहीं हो पाती हैं।

बुटोला ने कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारण को तुरंत हटाया जाना चाहिए। क्योंकि सनातन धर्म में इसका कहीं भी यह प्रावधान नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल को हमेशा खुला होना चाहिए, साथ ही ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। वाहन चालकों को दिया जाने वाला ग्रीन कार्ड कम से कम 6 माह का दिया जाय।

उन्हाेंने मांग की कि चारधाम यात्रियों एवं वाहन चालकों को जगह-जगह वेरीकेड पर नहीं रोका जाय। क्षेत्र के मास्टर प्लान की समिति में स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों का भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। चारधाम यात्रा के रास्ते में पड़ने वाले सभी होटल व्यवसाय, ढाबा, रेस्टोरेंट को गैस आपूर्ति की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाय, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो तथा स्थानीय लोगों एवं व्यापारियों की 10 सूत्रीय मांगों को शीघ्र पूर्ण किया जाय। पत्रकार वार्ता के दाैरान डॉ प्रतिमा सिंह, प्रदीप थपलियाल, मुकेश नेगी, नरेशानन्द नौटियाल, पवन नेगी और नैन सिंह भंडारी आदि उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल