गैरसैंण की ओर फिर सरकार की नजर, मानसून सत्र के संकेतों ने बढ़ाई सियासी हलचल
गोपेश्वर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में प्रस्तावित मानसून सत्र की तैयारियों ने प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। चमोली जिला प्रशासन ने सत्र को लेकर विभागवार तैयारियां शुरू कर दी हैं और अधिकारियों को व्यवस्थाएं समय से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई यह कवायद इस संभावना को बल दे रही है कि सरकार इस बार भी मानसून सत्र भराड़ीसैंण में आयोजित करने पर विचार कर रही है।
हालांकि सरकार की ओर से अभी सत्र का स्थान और कार्यक्रम लेकर औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में इसे फिलहाल प्रशासनिक तैयारियों से निकला संकेत ही माना जा रहा है। यदि मानसून सत्र भी भराड़ीसैंण में होता है तो 2026 में गैरसैंण में विधानसभा के दो सत्र आयोजित होंगे। इसी साल बजट सत्र भी भराड़ीसैंण में आयोजित हो चुका है।
गैरसैंण में लगातार दूसरे साल मानसून सत्र होने की स्थिति में यह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में लगातार तीसरा मानसून सत्र होगा, जो भराड़ीसैंण में आयोजित किया जाएगा। वर्ष 2024 में पहली बार भराड़ीसैंण में मानसून सत्र आयोजित हुआ था। इसके बाद 2025 में भी सरकार ने मानसून सत्र के लिए गैरसैंण का रुख किया।
बजट के बाद मानसून सत्र भी गैरसैंण में
इस बार बजट सत्र भी भराड़ीसैंण में आयोजित होने के बाद माना जा रहा था कि मानसून सत्र देहरादून में हो सकता है। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से भराड़ीसैंण में तैयारियां शुरू किए जाने से अब समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
सत्र की तैयारियों में पेयजल, बिजली, सड़क, स्वच्छता, सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और स्वास्थ्य जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
विभागों को स्थलीय निरीक्षण कर कमियां समय रहते दूर करने को कहा गया है। इससे साफ है कि प्रशासन भराड़ीसैंण को सत्र आयोजन के संभावित स्थल के रूप में लेकर तैयारी कर रहा है।
गैरसैंण पर धामी सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में गैरसैंण सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा है। विधानसभा सत्रों के अलावा मुख्यमंत्री स्वतंत्रता दिवस और राज्य स्थापना दिवस जैसे अवसरों पर भी भराड़ीसैंण पहुंचते रहे हैं।
वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के कारण बजट सत्र देहरादून में हुआ था, लेकिन इसी साल भराड़ीसैंण में पहली बार मानसून सत्र आयोजित किया गया। 2025 में भी मानसून सत्र के लिए गैरसैंण को चुना गया। अब 2026 में बजट सत्र के बाद मानसून सत्र के लिए भी भराड़ीसैंण में तैयारियां शुरू होना इस सिलसिले को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
गैरसैंण की राजनीति फिर क्यों महत्वपूर्ण
गैरसैंण को लेकर उत्तराखंड की राजनीति लंबे समय से भावनात्मक रही है। राज्य आंदोलन के दौरान ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग उठी थी। वर्ष 2014 में यहां तंबुओं में विधानसभा सत्र से शुरू हुआ सिलसिला भराड़ीसैंण विधानसभा भवन तक पहुंचा। वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया।
इसके बाद से गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यदि सरकार गैरसैंण में एक ही वर्ष में बजट और मानसून दोनों सत्र आयोजित करती है तो इसे राजनीतिक रूप से भी देखा जाएगा।
2014 से भराड़ीसैंण तक का सफर
गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का सिलसिला 2014 में शुरू हुआ। इसके बाद 2015 में गैरसैंण के पॉलिटेक्निक में सत्र हुआ और 2016 में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में पहली बार सत्र आयोजित किया गया। 2017 में यहां शीतकालीन सत्र और 2018 में बजट सत्र हुआ। 2020 में बजट सत्र के दौरान गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया।
मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल में भी भराड़ीसैंण की भूमिका लगातार बनी रही है। ऐसे में अब 2026 में बजट के बाद मानसून सत्र के लिए भी यहां तैयारियां शुरू होना गैरसैंण को लेकर सरकार की निरंतरता को रेखांकित करता है।
फिलहाल मानसून सत्र का स्थान और कार्यक्रम सरकार की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन चमोली प्रशासन की तैयारियों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि गैरसैंण एक बार फिर उत्तराखंड की सियासी चर्चाओं के केंद्र में लौट आया है। 2027 से पहले भराड़ीसैंण में होने वाला संभावित मानसून सत्र प्रशासनिक आयोजन से आगे किस तरह का राजनीतिक संदेश देता है, इस पर अब निगाहें टिकी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / जगदीश पोखरियाल

