गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने शोध कार्यों में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की भूमिका बताई
हरिद्वार, 07 मई (हि.स.)। शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में रचनात्मक बदलाव लाने के लिए शोध कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अनुसंधान कार्यों में परीक्षण एक विशिष्ट एवं प्रभावी उपकरण के रूप में कार्य करता है, जो आम जनमानस के जीवन को सरल और उपयोगी बनाने में सहायक सिद्ध होता है। यह बात गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवकुमार चौहान ने कही।
उन्होंने मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय द्वारा प्री-पीएचडी शोधार्थियों के लिए आयोजित कोर्स-वर्क कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि कोर्स-वर्क शोधार्थियों को अनुसंधान कार्यों की दिशा तय करने और शोध प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों को समझने एवं दूर करने में सक्षम बनाता है।
डॉ. चौहान ने कहा कि शिक्षा एवं सर्वेक्षण आधारित अनुसंधान में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मनोवैज्ञानिक परीक्षण व्यक्ति के व्यवहार को समझने और उसे संख्यात्मक अथवा श्रेणीबद्ध प्रणाली के माध्यम से अभिव्यक्त करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि ऐसे परीक्षण लिखित, दृश्य एवं मौखिक माध्यमों से संचालित किए जाते हैं तथा इनका उपयोग समय के साथ व्यक्तियों में आने वाले व्यवहारिक एवं मानसिक अंतर के मापन में किया जाता है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालन कर रहे शिक्षक डॉ. सहदेव सिंह मान ने भी प्री-पीएचडी शोधार्थियों के लिए कोर्स-वर्क को उपयोगी और आवश्यक बताया।
हाइब्रिड माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. अब्दुल अजीज खान, सत्यवीर सिंह, युवराज राणा, बल सिंह, मनजीत सिंह, सतपाल सिंह, शरद पंवार, सुनील कुमार और विकास कुमार सहित कई शिक्षाविद एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सहदेव सिंह मान द्वारा किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

