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करीब 20 साल से विस्थापन की बाट जोह रहे पड़ागली के पांच परिवार

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करीब 20 साल से विस्थापन की बाट जोह रहे पड़ागली के पांच परिवार


नई टिहरी, 28 सितंबर (हि.स.)। टिहरी बांध की झील में पैतृक जमीन और मकान डूबने के करीब दो दशक बाद भी भिलंगना ब्लॉक कके पड़ागली गांव के पांच परिवार विस्थापन की बाट जो रहे हैं। इन परिवारों ने डीएम/पुनर्वास निदेशक नितिका खंडेलवाल को पुनः प्रार्थना-पत्र देकर उन्हें पात्र विस्थापित घोषित करते हुए अनुमन्य कृषि और आवासीय भूखंड दिलाने की मांग की है।

सोमवार को अधिवक्ता शांति प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में पडागली के बालम सिंह, रणवीर सिंह, गुमान सिंह, शरण सिंह, पूनम देवी, राहुल ने बताया कि 29 अक्तूबर 2005 को टिहरी बांध झील में जलस्तर बढ़ने के बाद उनकी कृषि भूमि और पैतृक मकान झील में समा गए। वर्तमान में वे भूमिहीन है। तत्कलीन समय में प्रशासन ने गांव के 10 पात्र परिवारों को पौड़ीधार तोक में अस्थायी टिनशेड में शिफ्ट किया।

बताया कि पांच परिवारों का प्रशासन ने विस्थापन कर उन्हें कृषि व आवासीय भूखंड सहित प्रतिकर भुगतान कर दिया। लेकिन पांच परिवार आज भी पुनर्वास के लिए संघर्षरत है। डीएम को बताया कि 2007-08 में प्रशासन ने फिर से मौके का निरीक्षण कर जांच समिति गठित की थी। समिति ने रिपोर्ट में इन पांच परिवारों को वास्तविक डूब क्षेत्र में बताते हुए पात्रता स्वीकार करने और विस्थापन की संस्तुति की थी।

बावजूद इसके अभी तक कार्रवाई न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्पष्ट कराया कि उनकी भूमि गांव के खाता संख्या 00074 और 00067 में दर्ज थी। यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में टीएचडीसी के नाम पर दाखिल-खारिज हो चुकी है। उन्होंने पुनर्वास नीति के तहत तत्काल विस्थापन की मांग की। जिस पर डीएम ने संबंधित विभाग को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी