मायावती आश्रम में देश-विदेश के साधकों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
चंपावत, 07 जून (हि.स.) अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में मायावती स्थित विश्व प्रसिद्ध अद्वैत आश्रम में आयोजित विशेष योग सत्र ने योग, स्वास्थ्य और अध्यात्म के समन्वय का सशक्त संदेश दिया। हिमालय की शांत वादियों में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं और योग साधकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए योग को अपनाने का आह्वान किया।
जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशन तथा जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम की थीम स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग रखी गई थी। कार्यक्रम का शुभारंभ अद्वैत आश्रम के अध्यक्ष स्वामी सुहृदयानंद द्वारा भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद पूरे परिसर में योग और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण दिखाई दिया।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए योग सबसे प्रभावी माध्यम है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नयन का भी मार्ग है।
योग अनुदेशिका लीला जोशी के निर्देशन में आयोजित योगाभ्यास सत्र में योग अनुदेशक विजय देउपा और सोनिया आर्या ने प्रतिभागियों को कॉमन योगा प्रोटोकॉल के अनुरूप विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान प्रक्रियाओं का अभ्यास कराया। योग प्रशिक्षकों ने वृद्धजनों के लिए उपयोगी योग क्रियाओं की जानकारी देते हुए नियमित योगाभ्यास के लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अद्वैत आश्रम प्रबंधन समिति के सहयोग से आयोजित इस विशेष समूह योग कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुधाकर गंगवार ने किया। कार्यक्रम में जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के जिला नोडल अधिकारी डॉ. उमेश भारती, आश्रम से जुड़े संत-महात्मा, योग साधक, श्रद्धालु तथा आयुर्वेद विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान योग और अध्यात्म के गहरे संबंध पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है। मायावती आश्रम जैसे आध्यात्मिक केंद्रों में आयोजित ऐसे कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि लोगों को प्रकृति और आत्मचिंतन से जोड़ने का कार्य भी करते हैं।
हिमालय की गोद में आयोजित यह आयोजन स्वास्थ्य, अध्यात्म और भारतीय योग परंपरा के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव मुरारी

