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षोडश संस्कार भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक विरासत : गैरोला

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षोडश संस्कार भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक विरासत : गैरोला


हरिद्वार, 21 जनवरी (हि.स.)। षोडश संस्कार भारतीय जीवन परंपरा की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक विरासत हैं। सरकार चाहती है कि षोडश संस्कारों की महत्ता युवाओं तक पहुंचे। यह बात उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक गैरोला ने कही।

वह यहांराज्य सरकार द्वारा संचालित उत्तराखंड संस्कृत अकादमी (हरिद्वार) में आयोजित षोड़श संस्कार प्रशिक्षण कार्यशाला व्याख्यान माला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में दिनेश चंद्र शास्त्री, पूर्व कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार, प्रो.मनोज किशोर पंत, सचिव उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, मुख्य वक्ता डॉ सूर्य मोहन भट्ट व रामेन्द्री मंद्रवाल ने भी शोडस संस्कारों को लेकर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा शोडश संस्कार भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक विरासत है।

यह भारतीय जीवन पद्धति में हजारों साल से रचे बसे हैं। उत्तराखंड सरकार चाहती है कि षोडश संस्कारों का न केवल संरक्षण हो, वरन इनकी महत्ता को समाज के लोग खासकर युवा वर्ग समझे। इस अवसर पर आकदमी के सचिव मनोज किशोर पंत ने अपने उद्बोधन में संस्कृत और संस्कृति के प्रचार प्रसार को लेकर अकादमी की कार्य योजना पर प्रकाश डाला ।

कार्यक्रम में आकदमी के शोध अधिकारी डॉ हरीश गुरुरानी, डॉ अन्नपूर्णा, डॉ राम भूषण बिजल्वाण, डॉ शैलेन्द्र डंगवाल, डॉ आनन्द मोहन जोशी, डॉ संतोष विद्यालंकार, डॉ विद्या नेगी सहित प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रशिक्षु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गणेश फोन्दण ने किया

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला