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कल्पना की उड़ान बनी महिला उद्यमिता की नई मिसाल, गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत

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कल्पना की उड़ान बनी महिला उद्यमिता की नई मिसाल, गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत


कल्पना की उड़ान बनी महिला उद्यमिता की नई मिसाल, गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत


देहरादून, 14 मई (हि.स.)। जिले के विकासखंड विकासनगर के ग्राम सोरना डोभरी की रहने वाली महिला उद्यमी कल्पना बिष्ट आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बनकर उभरी हैं। राज्य सरकार की ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना और स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से उन्होंने 'स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट' स्थापित कर न केवल अपना व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अवसर भी दिया।

वर्ष 2024-25 में स्थापित इस बेकरी यूनिट की कुल लागत लगभग 10 लाख रुपये रही। इसमें रीप परियोजना से 6 लाख रुपये की सहायता, 7 प्रतिशत ब्याज दर पर 3 लाख रुपये का बैंक ऋण और 1 लाख रुपये का स्वयं का अंशदान शामिल था। आज यह यूनिट सालाना करीब 40 लाख रुपये का कारोबार कर रही है और स्थानीय स्तर पर 9 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही है। कल्पना बिष्ट कई वर्षों से 'स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन' से जुड़ी हुई हैं। उनके नेतृत्व में यह यूनिट अब ग्रामीण महिला उद्यमिता का सफल मॉडल बन चुकी है।

स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट में स्थानीय अनाज और मिलेट्स से तैयार उत्पादों को आधुनिक बाजार में नई पहचान मिली है। यहां मांडवे के बिस्कुट, गुड़-मक्खन बिस्कुट, हनी ओट्स बिस्कुट, मिल्क रस और गोलगप्पे जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की खासियत स्थानीय स्वाद, पौष्टिकता और पारंपरिक विधि है। यूनिट के कई उत्पाद 'हाउस ऑफ हिमालय' में भी लोकप्रिय हो चुके हैं। इसके अलावा कल्पना बिष्ट पहाड़ी दालों और कच्ची घानी सरसों तेल के व्यवसाय से भी जुड़ी हैं। चकराता की राजमा, तुअर और मसूर दाल की भी अच्छी मांग है।

38 वें राष्ट्रीय खेल के दौरान स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट ने विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों को मिलेट्स आधारित उत्पाद उपलब्ध कराए। इस दौरान यूनिट ने 27 क्विंटल गुड़-मक्खन, मांडवे, झंगोरे और शहद से बने बिस्कुट बेचकर लगभग 10 लाख रुपये की आय अर्जित की। हाल ही में आयोजित वसंत उत्सव में भी लोक भवन में लगाए गए स्टॉल के माध्यम से यूनिट को अच्छा लाभ मिला।

देहरादून से टिहरी-उत्तरकाशी तक पहुंचा स्वाद

शुरुआत में यह यूनिट केवल देहरादून और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन अब इसके उत्पाद देहरादून से आगे टिहरी और उत्तरकाशी तक पहुंच रहे हैं। विशेष रूप से मिल्क रस और मांडवे के बिस्कुट की मांग लगातार बढ़ रही है। उत्पादों की सप्लाई को आसान बनाने के लिए स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन की सहायता से शून्य प्रतिशत ब्याज पर एक इको वैन भी खरीदी गई है।

कल्पना बिष्ट ने अपने फैशन डिजाइनिंग कौशल का उपयोग उत्पादों की प्रीमियम पैकेजिंग में किया है। आकर्षक पैकेजिंग के कारण ग्राहकों के बीच उत्पादों की अलग पहचान बनी है और बाजार में उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

कल्पना बिष्ट ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2021 में स्वाभिमान महिला समूह के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए समूह को 5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की थी। इस राशि का उपयोग यूनिट की मार्केटिंग और पैकेजिंग को मजबूत करने में किया गया।

जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता के अनुसार स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट स्वच्छ और प्रोफेशनल तरीके से संचालित हो रही है तथा इसके उत्पादों की बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सफलता को देखते हुए अन्य विकासखंडों में भी ऐसी यूनिट स्थापित की जाएंगी। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी कल्पना बिष्ट की यह पहल आज प्रदेश की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय