उत्तराखंड वनाग्नि : ढाई महीने में 236 घटनाएं, 171 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित
देहरादून, 29 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड में इस वर्ष 15 फरवरी से 28 अप्रैल के बीच राज्य में कुल 236 वनाग्नि की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें करीब 171.07 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार गढ़वाल क्षेत्र में सर्वाधिक 186 घटनाएं दर्ज की गईं, जहां 135.12 हेक्टेयर क्षेत्र आग की चपेट में आया। वहीं कुमाऊं क्षेत्र में 29 घटनाओं में 23.4 हेक्टेयर और वन्यजीव एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में 21 घटनाओं से 12.55 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार बद्रीनाथ डिवीजन में सबसे ज्यादा 57 घटनाएं सामने आईं, जबकि रुद्रप्रयाग (31), चकराता (23) और केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग (20) भी गंभीर रूप से प्रभावित रहे। पिथौरागढ़, अलकनंदा मृदा संरक्षण और पौड़ी सिविल सोयम क्षेत्रों में भी आग की घटनाएं लगातार दर्ज की गई हैं।
मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन सुशांत पटनायक ने बताया कि वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है और फील्ड स्टाफ की निगरानी बढ़ाई जा रही है। विभाग द्वारा फायर वॉचर्स की तैनाती, कंट्रोल रूम सक्रिय करने और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाने के प्रयास तेज किए गए हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि जंगलों में आग लगाने या लापरवाही बरतने से बचें, क्योंकि अधिकांश घटनाएं मानवीय कारणों से सामने आती हैं। उन्होंने बताया कि इस बीच वनाग्नि की रोकथाम के लिए चीड़ (चिर) के पिरूल संग्रहण का कार्य भी शुरू किया जा रहा है। जिससे आग लगने की संभावना को कम किया जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

