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वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखें युवा वन अधिकारी: धामी

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वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखें युवा वन अधिकारी: धामी


देहरादून, 19 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन कायम करते हुए विकास को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री ने देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहा कि उत्तराखंड का करीब 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। राज्य के पर्वत, नदियां, वन और जैव विविधता इसकी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वन संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व है।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति का उत्तराखंड आगमन पर स्वागत करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया।

धामी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच वन अधिकारियों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों से आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। मिशन LiFE और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के जरिए पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है।

धामी ने कहा कि विकास परियोजनाओं को पर्यावरण की कीमत पर आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर करीब 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर को उन्होंने आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि पर अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए नियमावली में संशोधन किया गया है। वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा और पिरुल एकत्रीकरण के जरिए ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल और 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 को मजबूत किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि भी सुनिश्चित हो। उन्होंने भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारियों से राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय