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‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ पर चार दिवसीय लोक एवं जनजातीय कला कार्यशाला 24 अगस्त से

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देहरादून, 22 अगस्त (हि.स.)। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज,संस्कृति मंत्रालय, और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की थीम पर चार दिवसीय लोक एवं जनजातीय कला कार्यशाला,प्रदर्शनी और चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। आयोजन 24 से 27 अगस्त तक होगा। इसमें देशभर के करीब 50 कलाकार हिस्सा लेंगे।

कार्यशाला के समन्वयक डॉ.कृष्ण कुमार ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य लोक एवं जनजातीय कला को प्रोत्साहित करने के साथ पारंपरिक कला विधाओं को नई पीढ़ी से जोड़ना है। कलाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपराओं, प्रकृति, लोक जीवन और राष्ट्रप्रेम के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करेंगे।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों और कला विधाओं से जुड़े कलाकार अपनी विशिष्ट शैली में चित्र एवं अन्य कलाकृतियों का सृजन करेंगे। इस दौरान कलाकारों को एक-दूसरे की कला परंपराओं को समझने और कला तकनीकों के आदान-प्रदान का अवसर भी मिलेगा।

आयोजन के दौरान लोक एवं जनजातीय कला पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें कार्यशाला में तैयार कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम लोगों को भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविधता को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।

चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभागी ‘वन्दे मातरम्’ की भावना, इसके ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से कैनवास पर उकेरेंगे। प्रतियोगिता में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता चेतना, मातृभूमि के प्रति सम्मान और भारतीय जीवन मूल्यों की झलक देखने को मिलेगी।

ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद करमाकर ने बताया कि आयोजन में अनुभवी कलाकार अपनी कला की तकनीकों और बारीकियों को प्रतिभागियों के साथ साझा करेंगे। इससे युवा कलाकारों को पारंपरिक कला शैलियों को समझने और अपनी रचनात्मकता को नए आयाम देने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तबस्सुम नकवी के निर्देशन में आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. मंदाकिनी शर्मा और डॉ. नीलोत्पल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। आयोजकों के अनुसार चार दिवसीय कार्यक्रम कला, संस्कृति और राष्ट्रभावना का संगम प्रस्तुत करेगा और लोक एवं जनजातीय कला के संरक्षण और प्रोत्साहन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय