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महिला सशक्तिकरण सामाजिक उत्तरदायित्व, केवल एक संस्था का दायित्व नहीं : कुलपति

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महिला सशक्तिकरण सामाजिक उत्तरदायित्व, केवल एक संस्था का दायित्व नहीं : कुलपति


हल्द्वानी, 17 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय भवन में महिला आयोग : भूमिका, चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में महिला अधिकारों, सुरक्षा, सशक्तिकरण और लैंगिक समानता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। निदेशक अकादमिक प्रो. पी.डी. पंत ने स्वागत भाषण में कहा कि महिला सशक्तिकरण समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है तथा विश्वविद्यालय इस दिशा में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करता रहेगा।

समाज विज्ञान विद्याशाखा एवं महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. रेनू प्रकाश ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, न्याय सुनिश्चित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बदलते सामाजिक परिवेश में आयोग की भूमिका और अधिक व्यापक हुई है।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय महिला आयोग की डॉ. पलक मित्तल ने महिला आयोग की संवैधानिक एवं वैधानिक भूमिका, महिलाओं के अधिकार, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, बाल विवाह तथा महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और उपलब्ध कानूनी व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि राज्य महिला आयोग पिछले 23 वर्षों से महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान और न्याय दिलाने के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक आयोग की पहुंच बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने तथा महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को शिक्षा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए तथा महिला अध्ययन और लैंगिक समानता से जुड़े शोध एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के सह-संयोजक एवं शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के निदेशक प्रो. डिगर सिंह फर्सवान ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. नागेन्द्र गंगोला ने किया।

कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक, प्राध्यापक, शोधार्थी, प्रशासनिक अधिकारी, महिला आयोग के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता