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यूसीसी पंजीकरण प्रक्रिया हुई बहुभाषी, आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध

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यूसीसी पंजीकरण प्रक्रिया हुई बहुभाषी, आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध


देहरादून, 21 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत पंजीकरण प्रक्रिया को अब बहुभाषी बना दिया गया है। यूसीसी से संबंधित सेवाएं अंग्रेजी सहित भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे आवेदक अपनी पसंदीदा भाषा में नियमों, प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर आवेदन कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आवेदक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सहायता से यूसीसी की प्रक्रिया को समझते हुए अपना पंजीकरण भी कर सकता है।

उक्त जानकारी सूचना विभाग की एक विज्ञप्ति में दी गई है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन से पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि यूसीसी के अंतर्गत विभिन्न सेवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल एवं वेबसाइट को उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाए। जिससे आम नागरिक स्वयं पंजीकरण कर सके। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने यूसीसी की वेबसाइट को अंग्रेजी सहित आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं—असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल,तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली एवं मणिपुरी में विकसित किया गया है।

विज्ञप्ति में बताया गया कि यूसीसी पोर्टल को उपयोगकर्ता-अनुकूल और सरल बनाया गया है, साथ ही एआई आधारित सहायता की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि नागरिक बिना किसी कठिनाई के स्वयं पंजीकरण कर सकें। इस व्यवस्था के अंतर्गत आवेदक अपनी पसंदीदा भाषा में यूसीसी के नियमों,प्रक्रियाओं और पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर सकता है और उसी भाषा में आवेदन भी कर सकता है। इस प्रक्रिया में एआई आधारित सहायता की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

यूसीसी के अंतर्गत बीते एक वर्ष में विभिन्न सेवाओं के लिए पांच लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। सरकार के अनुसार इस अवधि में निजता उल्लंघन से संबंधित कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है। यूसीसी की आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और फेसलेस है,जिससे आवेदकों की पहचान गोपनीय बनी रहती है। यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण, विवाह विच्छेद, वसीयत, लिव-इन पंजीकरण एवं लिव-इन संबंध समाप्त करने जैसी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। औसतन पांच दिनों में प्रमाणपत्र उपलब्ध होने से नागरिकों का समय भी बच रहा है।

बुधवार को सूचना विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार की ओर से यह सुनिश्चित किया गया है कि समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में पंजीकरण प्रक्रिया सहज एवं सुलभ रहे। तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से यूसीसी को सरल एवं पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,बीते एक वर्ष में यूसीसी प्रक्रिया से संबंधित कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय