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प्रोजेक्ट लेखन और शोध अनुदान पर विशेष व्याख्यान

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प्रोजेक्ट लेखन और शोध अनुदान पर विशेष व्याख्यान


हरिद्वार, 11 जून (हि.स.)। समविश्वविद्यालय के शोध व विकास प्रकोष्ठ के निर्देशन में प्रोजेक्ट लेखन व अनुदान प्रदत्त संस्थाओं की उपयोगिता विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन विश्वविद्यालय के अतिथि गृह सभागार में किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य शोधार्थियों एवं शिक्षकों को प्रोजेक्ट लेखन की बारीकियों व विभिन्न अनुदान प्रदान करने वाली संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने में आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों और उनके समाधान से अवगत कराना था।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे सुधीर कुमार आर्य ने प्रोजेक्ट लेखन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बूंद को सागर बना दें, लेकिन सागर को बाल्टी में रखने की कोशिश न करें। उन्होंने शोध प्रस्ताव तैयार करने के दौरान विषय की स्पष्टता, उद्देश्य की सटीकता और व्यावहारिक दृष्टिकोण को सफलता की कुंजी बताया।

शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक डा. सुहास ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शोधार्थियों और शिक्षकों को भारत सरकार की विभिन्न अनुदान प्रदाता संस्थाओं द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों की जानकारी उपलब्ध कराना है। साथ ही उन्हें प्रोजेक्ट स्वीकृति से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं और महत्वपूर्ण पहलुओं से भी परिचित कराना है।

कार्यक्रम में प्रो. राकेश कुमार जैन, प्रो. अरुण कुमार, प्रो. सत्येन्द्र राजपूत, डा. दीनदयाल, डा. उधम सिंह, डा. संदीप कुमार, डा. शिव कुमार चौहान, डा. प्रणवीर सिंह, डा. अनुज कुमार, डा. वेदव्रत, कुलभूषण शर्मा तथा हेमंत सिंह नेगी सहित अनेक शिक्षकों ने सहभागिता की। वहीं शोधार्थियों में सरला राजपुरोहित, भावना, रजनीश और निर्वेदानन्द सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

व्याख्यान के दौरान शोध परियोजनाओं के सफल संचालन, अनुदान प्राप्ति की प्रक्रिया तथा शोध कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला