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खेतों की डिजिटल जांच: एचयूआरएल ने अपनाई ‘धरती का डॉक्टर’ तकनीक

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हरिद्वार, 05 अक्टूबर (हि.स.)। किसानों को उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने और खेती की लागत कम करने की दिशा में हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने तकनीक आधारित पहल शुरू की है। कंपनी ने पतंजलि समूह की कंपनी भरुआ एग्री साइंस द्वारा विकसित स्वचालित मृदा परीक्षण मशीन ‘धरती का डॉक्टर’ को अपनाते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार में नौ मृदा परीक्षण लैब स्थापित की हैं। इन केंद्रों पर किसान अपने खेत की मिट्टी की निशुल्क जांच करा सकेंगे।

एचयूआरएल ने इन लैब के लिए पतंजलि समूह से नौ स्वचालित मृदा परीक्षण मशीनें खरीदी हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर सहित पूर्वांचल के विभिन्न क्षेत्रों, मेरठ तथा बिहार के बक्सर समेत अन्य जिलों में मशीनें स्थापित की गई हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती की पहल से शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की वास्तविक स्थिति के आधार पर उर्वरक इस्तेमाल की सलाह उपलब्ध कराना है।

जरूरत से ज्यादा खाद डालने से बचेंगे किसान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हर खेत की मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति अलग होती है। इसके बावजूद कई किसान परंपरागत तरीके या अनुमान के आधार पर यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं। इससे जहां अनावश्यक खर्च बढ़ता है, वहीं मिट्टी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

मृदा परीक्षण से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि खेत में किस पोषक तत्व की कितनी जरूरत है। मसलन, यदि मिट्टी में फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में मौजूद है तो अतिरिक्त फॉस्फेट उर्वरक के इस्तेमाल से बचा जा सकता है। वहीं जिंक, सल्फर या अन्य पोषक तत्वों की कमी मिलने पर उसके अनुरूप उपचार और उर्वरक प्रबंधन किया जा सकेगा।

12 मानकों पर होगी मिट्टी की जांच

‘धरती का डॉक्टर’ मशीन की खासियत इसकी स्वचालित परीक्षण प्रणाली है। भरुआ एग्री साइंस के अनुसार मशीन मिट्टी के 12 प्रमुख मानकों की जांच करती है। इनमें पीएच, विद्युत चालकता (ईसी), जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज और बोरॉन शामिल हैं।

इन मानकों के जरिए मिट्टी की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति, लवणता, जैविक कार्बन तथा प्रमुख और सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। जांच के परिणामों के आधार पर किसान को फसल के अनुरूप उर्वरक प्रबंधन की सलाह मिल सकेगी।

40 मिनट में जांच और डिजिटल रिकॉर्ड

मशीन से मृदा परीक्षण की प्रक्रिया में औसतन करीब 40 मिनट लगने का दावा किया गया है। डिजिटल व्यवस्था के तहत नमूने की जानकारी और जियो-टैगिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इससे मिट्टी के नमूने को संबंधित खेत और स्थान से जोड़कर उसका रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जा सकता है। इसके अलावा उर्वरक कैलकुलेटर जैसी सुविधा मिट्टी की स्थिति और फसल की आवश्यकता के आधार पर उर्वरकों के प्रबंधन में मदद कर सकती है। इससे किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खाद के इस्तेमाल का विकल्प मिलेगा।

आईसीएआर में भी हुआ परीक्षण

भरुआ एग्री साइंस के अनुसार ‘धरती का डॉक्टर’ मशीन का परीक्षण हरियाणा के करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के विशेषज्ञों द्वारा किया गया है। कंपनी का दावा है कि परीक्षण के दौरान मशीन की क्षमता का आकलन किया गया और 12 प्रमुख मृदा मानकों की जांच की गई।

एचयूआरएल की ओर से मशीनों की स्थापना के बाद अब किसानों के लिए खेत की मिट्टी की जांच को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इससे मृदा स्वास्थ्य के अनुसार उर्वरक इस्तेमाल को बढ़ावा देने और अनावश्यक खाद खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला