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नैनीताल झील में स्नो ट्राउट संरक्षण की पहल, फिश केज में छोड़े गए फिंगरलिंग

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नैनीताल झील में स्नो ट्राउट संरक्षण की पहल, फिश केज में छोड़े गए फिंगरलिंग


नैनीताल, 16 अप्रैल (हि.स.)। नैनीताल झील के पारिस्थितिकी संतुलन एवं शीतजल मछली प्रजातियों के संरक्षण के उद्देश्य से कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर स्थित जंतु विज्ञान विभाग ने नैनीताल झील में स्नो ट्राउट (असेला) प्रजाति की मछलियों के संरक्षण व पुनर्स्थापन की पहल प्रारंभ की है। इसके तहत झील में फिश केज यानी एक तरह का मछलियों के लिये सुरक्षित क्षेत्र स्थापित कर प्रयोगशाला में विकसित फिंगरलिंग यानी मछली के बच्चों को संवर्धन के लिए छोड़ा गया है।

कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत ने बताया कि लगभग दो दशक पूर्व झील की स्थानीय मछली प्रजातियां लुप्तप्राय हो गई थीं, जिसके समाधान हेतु विश्वविद्यालय में बायोफ्लॉक मत्स्य प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. एचसीएस बिष्ट एवं उनकी टीम ने पारंपरिक तथा बायोफ्लॉक तकनीक से स्नो ट्राउट का सफल उत्पादन कर अब इसे झील में स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ किया है, जहां जल की गुणवत्ता एवं मछलियों के विकास का वैज्ञानिक अध्ययन भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय प्रजातियों का पुनर्जीवन और विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि स्नो ट्राउट प्रजाति की मछलियां शैवाल नियंत्रण में सहायक होकर जल गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परियोजना में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर पालिका परिषद नैनीताल की अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा तथा सिंचाई विभाग का सहयोग रहा।

विभागाध्यक्ष ने बताया कि उत्तराखंड मत्स्य कृषक विकास अभिकरण द्वारा नैनीताल, भीमताल, सातताल एवं नौकुचियाताल में फिश केज स्थापना का प्रस्ताव है, जिसे राज्य मत्स्य विभाग एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से क्रियान्वित किया जाएगा। परियोजना को विश्वविद्यालय की आंतरिक अनुसंधान निधि तथा मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना का भी समर्थन प्राप्त है।

कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद नैनीताल की अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा, प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. रीतेश साह, प्रो. आशीष मेहता सहित विश्वविद्यालय के अन्य प्राध्यापक, शोधार्थी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी