गायत्री जयंती महापर्व पर शांतिकुंज में दीक्षा व संस्कार
हरिद्वार, 24 जून (हि.स.)। गायत्री जयंती महापर्व के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित भव्य कार्यक्रम में देश-विदेश से आए हजारों साधकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर गायत्री मंत्र दीक्षा, मुण्डन, उपनयन सहित विभिन्न संस्कार निःशुल्क संपन्न कराए गए।
कार्यक्रम को संबोाित करते हुए डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि माँ गायत्री सद्बुद्धि प्रदान करती हैं और ओंकार के चिंतन से मन में श्रेष्ठ विचार विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री साधना मनुष्य के अंतरूकरण को परिष्कृत कर उसे श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा देती है। नियमित जप और ध्यान से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और विवेक का विकास होता है, जिससे वह समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के जीवन को साधना, स्वाध्याय और सेवा का अद्भुत समन्वय बताते हुए कहा कि उन्होंने मानव उत्थान, नैतिक जागरण और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।
वहीं संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि गायत्री आध्यात्मिक चेतना की देवी हैं, जबकि सावित्री भौतिक सृजन और जीवन संरचना की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक साधना वही है जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए और उसके व्यक्तित्व को दिव्यता की दिशा में अग्रसर करे।
गायत्री जयंती के अवसर पर प्रमुखद्वय ने सैकड़ों नए साधकों को गायत्री महामंत्र की दीक्षा प्रदान की। साथ ही मुण्डन, उपनयन सहित विभिन्न वैदिक संस्कारों का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान ष्गुरु की छाया में, हमें भक्ति दो माँ सहित 30 प्रज्ञागीतों के कराओके म्यूजिक ट्रैक का भी विमोचन किया गया। महापर्व में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं और साधकों की बड़ी संख्या ने भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा और संस्कारों का लाभ प्राप्त किया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

