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तीन दशक बाद भी जीवंत है मॉन्ट्रियल अश्वमेध की चेतना

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तीन दशक बाद भी जीवंत है मॉन्ट्रियल अश्वमेध की चेतना


हरिद्वार, 01 जून (हि.स.)। हरिद्वार की भूमि में जनवरी 2026 में हुए जन्मशताब्दी समारोह का संदेश लेकर अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ चिन्मय पण्ड्या कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर पहुंचे।

शांतिकुंज के मीडिया विभाग द्वारा सोमवार को जारी विज्ञप्ति मैं यह जानकारी देते हुए बताया गया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय के मार्गदर्शन में जुलाई 1996 में मॉन्ट्रियल में गायत्री अश्वमेध महायज्ञ सम्पन्न हुआ था। यह वर्ष मॉन्ट्रियल अश्वमेध महायज्ञ की 30वीं वर्षगांठ का वर्ष है।

इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने अश्वमेध महायज्ञ आयोजन से जुड़े समर्पित कार्यकर्ताओं से मिलकर उन्हें साधुवाद दिया। मॉन्ट्रियल में आयोजित एक विशेष सभा में देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि श्रद्धा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार है, जबकि पात्रता उस श्रद्धा को सार्थक परिणामों में रूपांतरित करने की शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने गायत्री परिजनों से आत्मपरिष्कार, सेवा और सद्भावना के माध्यम से गुरुसत्ता के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने हेतु प्रेरित किया।

शांतिकुंज के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे अभियान के अंतर्गत कनाडा पहुंचे युवा प्रतिनिधि डॉ चिन्मय पण्ड्या ने गायत्री परिजनों को गुरुसत्ता का आशीष एवं देव-स्थापना चित्र प्रदान किया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला