आपदा प्रबंधन सचिव ने सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत विभागीय प्रगति की समीक्षा की
देहरादून, 21 जनवरी (हि.स.)। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बुधवार को राज्य के विभिन्न विभागों के सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित बैठक में उन्होंने सेंडई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने विभाग का एक्शन प्लान प्रस्तुत करने को कहा।
समीक्षा बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क आपदाओं से होने वाली जनहानि, प्रभावित लोगों की संख्या, आर्थिक क्षति तथा बुनियादी सेवाओं और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने की दिशा में एक वैश्विक रूपरेखा प्रदान करता है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के सभी विभागों को अपनी विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी तथा प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी।
सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क की पहली प्राथमिकता आपदा जोखिम को समझना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपदा से संबंधित आंकड़ों का व्यवस्थित संग्रह, विश्लेषण एवं उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत आपदाओं से हुई क्षति का वैज्ञानिक मूल्यांकन, सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण एवं सांस्कृतिक विरासत पर पड़ने वाले प्रभावों की समझ, प्रशिक्षण एवं शिक्षा के माध्यम से सभी हितधारकों की क्षमता वृद्धि तथा वैज्ञानिक ज्ञान के साथ स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभवों के समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दूसरी प्राथमिकता, आपदा जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करना है। इसके लिए तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा। भूमि उपयोग, शहरी नियोजन, भवन निर्माण संहिता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों से संबंधित नियमों को सुदृढ़ करते हुए उनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही जनपद एवं राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित संस्थागत ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
तीसरी प्राथमिकता आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश के संबंध में उन्होंने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम कम करने हेतु योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। विकास योजनाओं में आपदा जोखिम मूल्यांकन, मानचित्रण एवं प्रबंधन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा तथा राज्य की महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं और सेवाओं को सुरक्षित बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ अपनाई जाएंगी। साथ ही स्थानीय, जनपद एवं राज्य स्तर पर जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को अपनाने वाले विभागों एवं संस्थानों की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चौथी प्राथमिकता आपदा के प्रति तैयारी तथा प्रभावी प्रतिक्रिया एवं पुनर्निर्माण को लेकर उन्होंने कहा कि आपदा पूर्व तैयारी, जन-जागरूकता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता व तकनीकी एवं लॉजिस्टिक क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण अत्यंत आवश्यक है। आपदा पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों में बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को अपनाते हुए भविष्य की आपदाओं के प्रति जोखिम को कम किया जाएगा। इसके अंतर्गत बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा चेतावनी के समयबद्ध और प्रभावी प्रसार पर भी बल दिया गया।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपनी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित प्रावधानों को अनिवार्य रूप से शामिल करें। विभागीय परिसंपत्तियों एवं अवसंरचनाओं पर संभावित खतरों का आकलन, जोखिम कम करने हेतु योजनाओं का विकास एवं क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, प्रशिक्षण, शोध एवं क्षमता विकास को प्राथमिकता दी जाए। सेंदाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य एवं जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी तथा विभागीय समन्वय के माध्यम से एक सुदृढ़ एवं समग्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण तंत्र विकसित किया जाएगा।
बैठक में वरिष्ठ आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डाॅ. पीडी माथुर ने बताया गया कि सेंडई फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों में आपदाओं से होने वाली मृत्यु दर में कमी, प्रभावित लोगों की संख्या में कमी, सकल घरेलू उत्पाद के सापेक्ष आर्थिक क्षति में कमी, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य बुनियादी सेवाओं तथा महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान में कमी तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को अपनाने वाले विभागों की संख्या में वृद्धि शामिल है।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारी तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

