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घाटों के लिए सिकुड़ रहा गंगनहर का दायरा, आबादी की सुरक्षा पर उठे सवाल

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घाटों के लिए सिकुड़ रहा गंगनहर का दायरा, आबादी की सुरक्षा पर उठे सवाल


हरिद्वार, 30 अक्टूबर (हि.स.)। कुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नए घाट विकसित करने की तैयारी अब गंगनहर की सुरक्षा और आसपास की आबादी को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि गंगनहर किनारे निर्माण में बायीं पटरी पर करीब तीन किमी क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल बनाकर पटरी को पांच से छह फीट तक चौड़ा किया जा रहा है, जिससे नहर का जल प्रवाह क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।

तकनीकी दृष्टि से चिंता यह है कि घाटों और पटरी के विस्तार से नहर में पानी के बहाव के लिए उपलब्ध क्षेत्र कम हो सकता है।

क्रॉस-सेक्शन में कमी आने पर समान मात्रा में पानी के प्रवाह की परिस्थितियां बदल सकती हैं, जिससे जल वेग और जलस्तर प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि इसका वास्तविक असर निर्माण की डिजाइन और जल प्रवाह के तकनीकी परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

गोविंदपुरी से कृष्णानगर तक सुरक्षा की चिंता

जल प्रवाह क्षेत्र में कमी और अधिक डिस्चार्ज के दौरान जलस्तर बढ़ने की आशंका ने गोविंदपुरी, नया हरिद्वार और कृष्णानगर समेत आसपास की आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि यदि नहर के बहाव या किनारों पर दबाव की स्थिति बदली तो बस्तियों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

यूपी सिंचाई विभाग से एनओसी का सवाल

गंगनहर का संचालन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की उत्तरी खंड गंगनहर इकाई के पास है। आरोप है कि उत्तराखंड की कार्यदायी संस्था ने निर्माण से पहले यूपी सिंचाई विभाग से लिखित एनओसी नहीं ली। अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने पुष्टि की है कि उत्तराखंड की ओर से अनुमति नहीं ली गई है। उन्होंने संबंधित विभाग को नोटिस भेजकर निर्माण की ड्राइंग, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज तलब किए हैं।

दो राज्यों के अधिकारों के बीच निर्माण

9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड गठन के बाद से गंगनहर के संचालन, परिसंपत्तियों और भूमि स्वामित्व को लेकर दोनों राज्यों के बीच मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि घाटों की डिजाइन तैयार करते समय अधिकतम जल प्रवाह, नहर की वहन क्षमता और आबादी की सुरक्षा का समुचित आकलन किया गया या नहीं? आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियां ली गईं या नहीं? यदि भविष्य में जलस्तर बढ़ने से कॉलोनियों को नुकसान होता है तो जवाबदेही किसकी होगी?

अर्धकुंभ के लिए बेहतर घाट जरूरी हैं, लेकिन साथ ही गंगनहर की सुरक्षा और हजारों लोगों की चिंता को भी प्राथमिकता देनी होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला