home page

सवर्ण समन्वय समिति की बैठक, राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा गठन का प्रस्ताव पास

 | 
सवर्ण समन्वय समिति की बैठक, राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा गठन का प्रस्ताव पास


हरिद्वार, 24 अप्रैल (हि.स.)। हरिद्वार के भोलगिरी रोड स्थित गीता भवन में सवर्ण समन्वय समिति की बैठक में 'राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा' के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में देशभर में संगठन के विस्तार और भविष्य में चुनावी भागीदारी को लेकर भी सहमति बनी। इस दौरान विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक की अध्यक्षता ग्वालियर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा ने की। बैठक को जन सामान्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जुगल किशोर तिवारी ने संबोधित करते हुए देश में एक 'राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा' बनाने का सुझाव रखा। जिसमे कहा गया कि इस मोर्चे की अध्यक्षता अनिल कुमार मिश्रा करें, जबकि संयोजक के रूप में पूर्व न्यायाधीश चंद्रभूषण पांडे और प्रवक्ता के रूप में पंकज त्रिपाठी को जिम्मेदारी दी जाए। इस प्रस्ताव को उपस्थित सदस्यों बहुमत से पारित कर दिया।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय सवर्ण मोर्चा देशभर में सक्रिय होकर इंडी और एनडीए गठबंधनों से अलग राजनीतिक दलों और संगठनों को इस मंच से जोड़ेगा। समिति ने जाति के आधार पर बनाए गए वर्गों और विभिन्न नियम-कानूनों का विरोध करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज को विभाजित करने वाली नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाना आवश्यक है।

बैठक में भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा करते हुए यह निर्णय लिया गया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह मोर्चा सक्रिय रूप से भाग लेगा। इसके तहत सवर्ण आयोग के गठन, गाय को राष्ट्र माता घोषित करने तथा जल, जंगल और जमीन को उनके मूल स्वरूप में संरक्षित करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही समाज को बांटने वाले नियम-कानूनों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

अगली बैठक नई दिल्ली में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठन प्रमुखों के साथ व्यापक स्तर पर चर्चा की जाएगी।

बैठक में प्रमुख रूप से जन सामान्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जुगल किशोर तिवारी, एडवोकेट राजेन्द्र पाण्डेय, परिवर्तन शुक्ला, अधीर कौशिक, बालकृष्ण शास्त्री और विनोद प्रसाद नौटियाल सहित कई संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला