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गुरू के बिना कोई भवसागर नहीं तर सकता: स्वामी विवेकानंद

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गुरू के बिना कोई भवसागर नहीं तर सकता: स्वामी विवेकानंद


हरिद्वार, 20 अप्रैल (हि.स.)। ब्रह्मलीन स्वामी तुरियानंद महाराज का 55वॉ निर्वाण दिवस महोत्सव संत सम्मेलन के साथ मनाया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में सभी अखाड़ो के महामण्डलेश्वर, महंत, साधु-संतो के अलावा विभिन्न प्रांतो से श्रद्वालुगण शामिल हुए।

संत सम्मेलन में बोलते हुए स्वामी विवेकानंद गिरि ने कहा कि जिस तरह कचरे मे ढेर में पड़ा हुआ तांबे का टुकड़ा बिजली के लाईन के साथ जुड़कर प्रकांड शक्ति अर्जित कर लेता है, उसमें उतनी ही ताकत आ जाती है, जितनी एक पावर हाऊस में होती है। ठीक इसी तरह माया की उलक्षन में पड़ा हुआ जीव जब सतगुरू रूपी चन्दन के वृक्ष के साथ जुड़ जाता है तो गुरूदेव, अपनी तरह उसे शक्ति पात करके उसकी चेतना को पूर्ण बह्म -निरंकार के साथ जोड़ देता है। उसमें भी अनन्त भक्ति की शक्ति का उदय व विस्तार होने लगता है। कहा कि गुरू के बिना कोई भवसागर नही तर सकता, चाहे वह ब्रहमा और शंकरजी समान ही क्यों न हो।

संत सम्मेलन में साधना सदन आश्रम पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वात्मानन्द पुरी, म.म.स्वामी दिव्यानंद पुरी, महंत ज्ञानदेव महाराज, स्वामी केशवानंद, स्वामी दिनेशानन्द, आचार्य स्वामी सदाशिवानंद गिरि, स्वामी अभिषेक चौतन्य, स्वामी विज्ञानानंद महाराज, स्वामी भगवत स्वरूप, स्वामी शिवानंद, स्वामी ज्ञानानंद तथा स्वामी प्रज्ञानन्द पुरी सहित विभिन्न राज्य के आये श्रद्वालुओं के साथ साथ स्वामी तुरीयानंद ट्रस्ट से जुड़े सभी पदाध्किारीगण एवं अन्य श्रद्वालु भक्त मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला