गुरु दक्षिणा उत्सव में संस्कार और राष्ट्रभावना पर दिया जोर
गुप्तकाशी, 29 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से सांकला में गुरु दक्षिणा उत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सचिन रमोला ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ व्यक्ति निष्ठ नहीं, बल्कि तत्व निष्ठ संगठन है। उन्होंने कहा कि संघ का स्वयंसेवक किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि पवित्र भगवा ध्वज को अपना गुरु मानता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में स्थापित संघ इस वर्ष अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। गुरु दक्षिणा उत्सव के अवसर पर स्वयंसेवक अपनी सामर्थ्य के अनुसार भगवा ध्वज का पूजन कर दक्षिणा अर्पित करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सीताराम कोठारी ने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी और विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाना आवश्यक है, ताकि वे देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझ सकें।
इस अवसर पर अमिताभ चमोली ने भारत माता के प्रथम चित्र के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह चित्र प्रारंभ में अवनींद्रनाथ टैगोर द्वारा बनाया गया था, जिसे बाद में भगिनी निवेदिता ने भारत माता के रूप में पहचान दी। उन्होंने बताया कि चित्र में पुस्तक, अनाज, वस्त्र और माला के माध्यम से ज्ञान, समृद्धि, आत्मनिर्भरता और आध्यात्मिकता का संदेश दिया गया था।
कार्यक्रम का संचालन सूरज जोशी ने किया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक स्वयंसेवक और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बिपिन

