51 रोपवे परियोजनाओं से 160 किमी नेटवर्क तैयार करने की तैयारी
देहरादून, 20 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड में धार्मिक और पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी में करीब 160 किलोमीटर लंबाई की 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को आगामी नौ नवंबर तक परियोजनाओं का काम धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। इससे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने के साथ सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
सरकार के अनुसार, राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे को सड़क परिवहन के वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे दुर्गम क्षेत्रों में आवाजाही आसान होने के साथ धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होगी। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है।
प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में रुद्रप्रयाग की सोनप्रयाग-केदारनाथ और कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, चमोली की गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब तथा जोशीमठ-औली-गोरसों, नैनीताल की रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम और उत्तरकाशी की रैथल-दयारा बुग्याल रोपवे परियोजनाएं शामिल हैं।
देहरादून जिले में पुरुकुल गांव से लाइब्रेरी, मसूरी तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। परियोजना पूरी होने के बाद देहरादून से मसूरी की यात्रा में लगने वाला करीब एक से डेढ़ घंटे का समय घटकर 15 से 20 मिनट रह जाने का अनुमान है।
जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे से श्रद्धालुओं को करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं चंपावत जिले में ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे से पूर्णागिरि धाम की यात्रा सुगम होगी। इस वर्ष एक अप्रैल से 19 सितंबर तक 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालुओं के पूर्णागिरि पहुंचने की जानकारी दी गई है।
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार, ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट से पौड़ी जिले में स्थित नीलकंठ मंदिर तथा हरिद्वार की इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजनाओं पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। नीलकंठ रोपवे की कुल लंबाई करीब छह किलोमीटर प्रस्तावित है, जबकि पहले चरण में त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जा रहा है। इससे ऋषिकेश में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हरिद्वार में चंडी देवी-मंसादेवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अतिरिक्त दो समानांतर नए अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।
रोपवे परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल), उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, शहरी स्थापना एवं भवन निर्माण निगम व पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

