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डीएम रयाल के एक वर्ष के कार्यकाल में 31 हजार 9 सौ 79 राजस्व वादों का किया निस्तारण

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डीएम रयाल के एक वर्ष के कार्यकाल में 31 हजार 9 सौ 79 राजस्व वादों का किया निस्तारण


नैनीताल, 15 अक्टूबर (हि.स.)। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के एक वर्ष के कार्यकाल में जनपद में राजस्व वादों के निस्तारण और भूमि संबंधी प्रकरणों के समाधान की दिशा में बड़ी कार्रवाई की गई हैं। एक अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक विभिन्न न्यायालयों में कुल 37,383 वाद विचाराधीन थेे, जिनमें से 31,979 का निस्तारण किया गया।

इस प्रकार इस अवधि में निस्तारण की दर 85.54 प्रतिशत रही, जबकि 5,404 वाद शेष बजे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व प्रवर्तन समिति के अंतर्गत पिछले एक वर्ष में 14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक कुल 5,745 प्रकरण दर्ज हुए थे। इनमें से 5,611 का निस्तारण किया गया, जबकि 134 प्रकरण ही लंबित हैं। इस प्रकार लगभग 97.67 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण हो गया है।

इनके साथ ही मार्गों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण के 857 मामलों में से 856, सिंचाई गूलों पर अतिक्रमण के 83 में से 78 तथा मार्ग निर्माण में बाधा के 71 में से 70 मामलों का निस्तारण भी किया गया है। जबकि सार्वजनिक रास्तों और नहरों में अतिक्रमण से जुड़े सभी 100 प्रकरणों का निपटारा किया गया।

वहीं भूमि पैमाइश के 2,491 मामलों में से 2,398 का निस्तारण हो गया है। मेढ़ विवाद के 957 मामलों में से 945 और नाम संशोधन के 290 मामलों में से 284 का निपटारा किया गया है। साथ ही कुर्री नक्शों से संबंधित 131 में से 117 तथा अन्य श्रेणी के 765 में से 763 प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया है।

इसी तरह जिला कलेक्टरएवं जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दर्ज 472 वादों में से 364 का निस्तारण किया गया। इस श्रेणी में 108 वाद शेष रहे और निस्तारण दर 77.11 प्रतिशत रही है। साथ ही जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में चौपालों के माध्यम से विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी संचालित की गई है।

14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मृतक खातेदारों की विरासत दर्ज करने के लिए 9,783 प्रकरण दर्ज हुए। इसके अतिरिक्त 18,906 खातों और 34,897 वारिसों एवं लाभार्थियों के नाम विरासत संबंधी अभिलेखों में दर्ज किए जाने का विवरण भी दिया गया है। इन आंकड़ों में नैनीताल, हल्द्वानी, रामनगर, कालाढूंगी, लालकुआं, धारी, खनस्यूं, श्री कैंचीधाम और बेतालघाट तहसीलें शामिल हैं।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भूमि पैमाइश, सीमांकन विवाद, अतिक्रमण और विरासत दर्ज कराने जैसे मामलों में बड़ी संख्या में प्रकरणों का निस्तारण किया गया। हालांकि, विभिन्न श्रेणियों में कुछ मामले अभी भी लंबित हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी