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लोक गायिका डॉ. रेशमा शाह ने पलायन पर किया प्रहार,बोलीं-गांव बचेंगे तो पहाड़ बचेंगे

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लोक गायिका डॉ. रेशमा शाह ने पलायन पर किया प्रहार,बोलीं-गांव बचेंगे तो पहाड़ बचेंगे


मसूरी, 03 अगस्त (हि.स.)। लोक गायिका डॉ. रेशमा शाह ने अपने नए उत्तराखंडी गीत 'पहाड़ घूमणा' को महज पर्यटन गीत नहीं, बल्कि पलायन के खिलाफ एक सामाजिक संदेश बताया है। उन्होंने कहा कि गीत के माध्यम से उनका प्रयास उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को दुनिया तक पहुंचाने के साथ-साथ लोगों को अपनी जड़ों, गांवों और संस्कृति से दोबारा जोड़ना है।

मसूरी में सोमवार को गीत के संबंध में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. रेशमा शाह ने बताया कि इस गीत का पहला लोकार्पण मुंबई में प्रसिद्ध गजल एवं भजन गायक अनूप जलोटा के जन्मदिन के अवसर पर उनके आवास पर किया गया था। कार्यक्रम में बॉलीवुड की कई हस्तियां मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि अनूप जलोटा ने गीत सुनने के बाद उनकी आवाज और प्रस्तुति की सराहना की तथा उनके साथ एक भक्ति गीत भी गाया, जिसे वह अपने लिए सम्मान और प्रेरणा मानती हैं।

इस अवसर पर मधु मेल्होत्रा और प्रीती मेल्होत्रा ने शॉल भेंट कर डॉ. रेशमा शाह का सम्मान किया। डॉ. रेशमा शाह ने कहा कि 'पहाड़ घूमणा' उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ा संदेश है। गीत के माध्यम से पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण, पारंपरिक गांव, खेत-खलिहान, बाग-बगीचे और स्थानीय संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है, ताकि उत्तराखंड को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अपनी विरासत के रूप में देखा जाए।

उन्होंने पलायन पर चिंता जताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं। इससे गांव खाली हो रहे हैं और लोग अपनी पैतृक जमीनें बेच रहे हैं। इन जमीनों पर तेजी से हो रहे निर्माण से पहाड़ों का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और आपदाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।

रेशमा शाह ने कहा,'यदि गांव खाली हो जाएंगे तो हमारी संस्कृति, हमारी बोली और हमारी पहचान भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। हर व्यक्ति को अपने गांव से जुड़ाव बनाए रखना चाहिए। समय-समय पर गांव जाकर अपने घर, खेत, बगीचे और जंगलों की देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारी असली पूंजी है।'

उन्होंने कहा कि पलायन रोकने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। लोगों को अपनी जन्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी और अपनी संस्कृति व विरासत को बचाने के लिए आगे आना होगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि इस गीत को सुनकर कुछ लोग भी अपने गांव लौटने,अपनी पैतृक संपत्ति बचाने और पहाड़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं तो यही इस प्रयास की वास्तविक सफलता होगी। इस अवसर पर विजय विंदवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय