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पूरी पृथ्वी अमृत है, भारत माता परम अमृत है: बापू

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पूरी पृथ्वी अमृत है, भारत माता परम अमृत है: बापू


हरिद्वार, 04 जुलाई (हि.स.)। हरिद्वार में चल रही रामकथा के पांचवें दिन मुरारी बापू ने कहा कि पूरी पृथ्वी अमृत है और भारत माता परम अमृत है। उन्होंने कहा कि गीता पृथ्वी का अमृत है, जबकि भद्रपुरुषों के अधरों से निकला वचन ही वास्तविक अधरामृत है। कथा के प्रारंभ में श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए बापू ने कहा कि धरती से प्राप्त प्रत्येक वस्तु अमृत स्वरूप है, लेकिन जब उसका व्यापार होने लगता है तो उसका स्वरूप बदल जाता है। उन्होंने कहा कि अधरामृत वह दिव्य वचन है जिसे बेचा नहीं जाता, बल्कि लोककल्याण के लिए बांटा जाता है। उपनिषद, भागवत, ब्रह्मसूत्र और व्यासपीठ से निकले वचनों को उन्होंने अलौकिक अधरामृत बताया।

रामचरितमानस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बापू ने कहा कि इसका स्वरूप साधक की दृष्टि पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, कुछ लोगों के लिए यह मानस महाकाव्य है, साधुओं के लिए महामंत्र है। आपके लिए यह प्रवचन है, मेरे लिए यह स्वाध्याय है। श्रद्धालुओं के लिए रामचरितमानस गुरु है, साधुओं के लिए सद्गुरु, श्रोताओं के लिए ज्ञान और वक्ता के लिए यह एक गान है। उन्होंने कहा कि उपनिषद स्वाध्याय और प्रवचन में प्रमाद न करने का संदेश देते हैं तथा सच्चा वक्ता स्वयं को बोलने वाला नहीं, बल्कि स्वाध्याय करने वाला मानता है।

योग की महिमा का वर्णन करते हुए बापू ने कहा कि योग भी अमृत है और वियोग भी अमृत है, क्योंकि वियोग के मंथन से प्रेम का अमृत प्रकट होता है। उन्होंने समता, पवित्र वातावरण और एकाग्रता को योग की अनिवार्य शर्त बताते हुए कहा कि योग से शरीर, मन और आत्मा में दिव्यता का संचार होता है। कथा के दौरान बापू ने शिव चरित्र को कल्याण अमृत, सीताराम चरित्र को सत्य अमृत, भरत चरित्र को प्रेमामृत, हनुमान चरित्र को वैराग्य अमृत और काकभुशुण्डि चरित्र को साधु अमृत बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में नयनामृत, वचनामृत, कृपामृत, प्रेमामृत, श्रवणामृत और कथामृत सहित अनेक अमृत स्वरूपों का वर्णन मिलता है।

रामकथा के दौरान योगऋषि बाबा रामदेव भी उपस्थित रहे। उन्होंने योग, सनातन परंपरा तथा बापू के प्रति अपना सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। कथा के समापन पर बापू ने विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम के वनगमन और सीता-राम विवाह का प्रसंग सुनाते हुए बालकांड का समापन कर पांचवें दिन की कथा को विराम दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला