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मनोविज्ञान के अंतर्विषयक स्वरूप पर जोर

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मनोविज्ञान के अंतर्विषयक स्वरूप पर जोर


हरिद्वार, 07 अक्टूबर (हि.स.)।सामाजिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के बीच मनोविज्ञान को शिक्षा, स्वास्थ्य, योग और सामाजिक विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जोड़कर देखने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने बुधवार को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में यह बात कही।

विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग ने अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ (आरडीसी) के सहयोग से ‘साइकोलॉजी बियॉन्ड बाउंड्रीज : इंटरडिसिप्लिनरी पाथवेज टू ह्यूमन फ्लरिशिंग एंड वेल-बीइंग’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से 260 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

मुख्य वक्ता प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक प्रो. नवीन गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय की जटिल मानवीय समस्याओं को समझने के लिए किसी एक विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विभिन्न विषयों के ज्ञान को एक-दूसरे से जोड़कर ही प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने मनोविज्ञान के अंतर्विषयक स्वरूप को मानव कल्याण और समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमलांकर ने कहा कि मनोविज्ञान की भूमिका केवल मानसिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास से भी इसका सीधा संबंध है। आइक्यूएसी निदेशक प्रो. पंकज मदान ने विद्यार्थियों के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण को आवश्यक बताते हुए अनुसंधान और नवाचार को मानवीय मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया।

आरडीसी अध्यक्ष डॉ. सुहास ने कहा कि अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देना और विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को संवाद का मंच उपलब्ध कराना प्रकोष्ठ की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।

विशेष व्याख्यान में प्रो. राकेश बहमनी ने मनोवैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि मनोविज्ञान को अन्य विषयों से जोड़कर ही मानव जीवन की जटिलताओं को व्यापक संदर्भ में समझा जा सकता है।

संगोष्ठी में प्रो. ब्रह्मदेव, प्रो. दिनेश शास्त्री, प्रो. राकेश जैन, डॉ. मनोज चौहान, डॉ. नवीन पंत, डॉ. ऋचा सक्सेना और डॉ. विक्रम सिंह समेत शोधार्थियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। संचालन डॉ. ऋचा सक्सेना ने किया। डॉ. सुनीता रानी ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की और डॉ. दीपक सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला