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जश्न नहीं, जवाब दे सरकार: यशपाल आर्य

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जश्न नहीं, जवाब दे सरकार: यशपाल आर्य


देहरादून, 13 अप्रैल (हि.स.)। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी के दौरे को लेकर कहा कि प्रदेश में जश्न का माहौल बनाया जा रहा है, लेकिन जनता के मूलभूत सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने सोमवार को एक जारी बयान में कहा कि गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अब प्रधानमंत्री के दौरे के बीच सरकार उपलब्धियों का जश्न मना रही है, जिसका वे स्वागत करते हैं, लेकिन इस शोर में जनता की समस्याओं को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह जश्न किस बात का है-क्या बेरोजगारी, महंगाई, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, पलायन या कानून व्यवस्था की स्थिति का?

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि चार वर्षों में उसे वास्तव में क्या मिला। महंगाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सरकार बताए कि राहत के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए।

युवाओं के मुद्दे पर आर्य ने कहा कि प्रदेश का युवा बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और पेपर लीक से परेशान है। सरकार स्पष्ट करे कि कितनी स्थायी नौकरियां दी गईं और कितने युवाओं का भविष्य इन घोटालों से प्रभावित हुआ।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पताल डॉक्टरों, दवाओं और उपकरणों के अभाव में जूझ रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूलों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही संसाधन, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

पलायन के मुद्दे पर आर्य ने कहा कि गांव खाली हो रहे हैं और पहाड़ वीरान हो रहे हैं। सरकार बताए कि इसे रोकने के लिए उसकी ठोस नीति और रोडमैप क्या है। कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अपराध बढ़ रहे हैं और सरकार इस पर मौन है। साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों में ठोस कार्रवाई न होने पर भी सवाल खड़े किए।

उन्होंने आपदा प्रबंधन को लेकर कहा कि प्रभावितों का स्थायी पुनर्वास अब तक नहीं हो पाया है और हर साल आपदा के बाद केवल मुआवजे की घोषणा कर दी जाती है। सरकार बताए कि रोकथाम के लिए दीर्घकालिक योजना क्या है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता अब 'इवेंट मैनेजमेंट' की राजनीति से ऊब चुकी है और उसे जश्न नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि उपलब्धियां वास्तविक हैं तो उन्हें आंकड़ों के साथ सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा यह जश्न जनभावनाओं के साथ मजाक है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय