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बदरी-केदार मंदिरों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच हो : यशपाल आर्य

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बदरी-केदार मंदिरों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच हो : यशपाल आर्य


देहरादून, 07 जुलाई (हि.स.)। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों से जुड़े विभिन्न आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि इसकी जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति अथवा उत्तराखंड विधानसभा की सर्वदलीय समिति से कराई जानी चाहिए।

मंगलवार को जारी बयान में आर्य ने कहा कि केदारनाथ मंदिर के स्वर्ण प्रकरण और अयोध्या के राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं की चर्चाओं के बाद अब श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से संबंधित कथित गड़बड़ी की खबरों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन मामलों पर गंभीरता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

यशपाल आर्य ने दावा किया कि पिछले लगभग दस वर्षों से श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में अध्यक्ष सहित अधिकांश सदस्य भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। इस दौरान समिति के कार्यों को लेकर समय-समय पर विभिन्न प्रकार के आरोप सामने आए, लेकिन सरकार ने किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केदारनाथ स्वर्ण प्रकरण में भी अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जांच किस एजेंसी ने की, उसकी रिपोर्ट क्या है और उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। आर्य ने आरोप लगाया कि हाल में सार्वजनिक हुए कुछ अभिलेखों से मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों, सदस्यों और कर्मचारियों द्वारा मंदिर निधि के उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर समिति अध्यक्ष ने 20 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की घोषणा की थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि अब बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे में जब आरोप अध्यक्ष के निजी स्टाफ से जुड़े लोगों पर लगाए जा रहे हों, तो उसी व्यवस्था द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बदरीनाथ धाम और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं इसलिए इन मंदिरों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोप केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि जनआस्था से जुड़े गंभीर विषय हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति अथवा विधानसभा की सर्वदलीय जांच समिति से कराई जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय