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औषधीय जड़ी-बूटियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन

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औषधीय जड़ी-बूटियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन


औषधीय जड़ी-बूटियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन


हल्द्वानी, 27 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) में सोमवार को आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ ही उत्तराखंड की औषधीय वनस्पतियों पर आधारित पुस्तक 'ग्लॉसरी ऑफ कमर्शियल मेडिसिनल हर्ब्स ऑफ उत्तराखण्ड' का विमोचन किया गया।

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय योजना बोर्ड के सदस्य प्रो. प्रदीप कुमार जोशी, मुख्य वन संरक्षक (कुमाऊँ) डॉ. तेजस्विनी अरविन्द पाटिल और मोनार्ड इंडस्ट्रीज के निदेशक डॉ. बी.एस. कालाकोटी ने संयुक्त रूप से पौधारोपण किया। इस दौरान शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में विमोचित पुस्तक के सह-लेखक डॉ. बी.एस. कालाकोटी ने बताया कि इसमें उत्तराखंड की व्यावसायिक और औषधीय महत्व की जड़ी-बूटियों का प्रामाणिक एवं व्यावहारिक विवरण संकलित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों, कृषकों, उद्यमियों और औषधीय पौधों के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।

मुख्य वन संरक्षक डॉ. तेजस्विनी अरविन्द पाटिल ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण के लिए केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और संवर्धन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने औषधीय पौधों के वैज्ञानिक प्रलेखन और जन-जागरूकता में ऐसे प्रकाशनों की महत्वपूर्ण भूमिका बताते हुए विश्वविद्यालय और वन विभाग के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार जोशी ने वृक्षारोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जैव विविधता और पारंपरिक वनस्पति ज्ञान के संरक्षण में यह पुस्तक महत्वपूर्ण योगदान देगी तथा इसे हिंदी में भी प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रदेश की जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है और औषधीय जड़ी-बूटियों पर प्रकाशित यह पुस्तक विश्वविद्यालय तथा राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता