'उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइस पॉल्यूशन' अभियान का शुभारंभ, नियमों के सख्त पालन की मांग
देहरादून, 04 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ शनिवार को 'उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइस पॉल्यूशन' नामक नागरिक अभियान की शुरुआत की गई। देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, सेवानिवृत्त सैन्य एवं सिविल अधिकारियों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने अभियान का शुभारंभ करते हुए ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की।
अभियान के संयोजक अनूप नौटियाल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राज्य में ध्वनि प्रदूषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, विभिन्न शहरों में स्थानीय चैप्टर स्थापित कर नागरिक आंदोलन खड़ा करना, होटल, रिसॉर्ट, विवाह स्थल, धार्मिक आयोजकों एवं अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्वेच्छा से ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित करना तथा पुलिस, नगर निकायों, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य एजेंसियों से नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराना है।
कार्यक्रम में कई स्थानीय नागरिकों और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने ध्वनि प्रदूषण से होने वाली परेशानियों को साझा किया। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अतुल रावत ने आरोप लगाया कि मसूरी डायवर्जन क्षेत्र में रेस्तरां, पब और निर्माण गतिविधियों के शोर के कारण उन्हें अपने घर में ध्वनि-रोधी व्यवस्था कराने पर लगभग दो लाख रुपये खर्च करने पड़े। उन्होंने कहा कि इसका असर उनके वृद्ध माता-पिता के स्वास्थ्य पर भी पड़ा है।
लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) करुणा थपलियाल ने कहा कि कुठाल गेट क्षेत्र में लगातार ध्वनि प्रदूषण के कारण उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा। उन्होंने शिकायत के बाद उत्पीड़न का भी आरोप लगाया।
मालसी गांव के निवासी और सर्वे ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त अधिकारी धर्म सिंह रावत सहित अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के कुछ होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से होने वाला तेज शोर स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। कई वक्ताओं ने बच्चों, बुजुर्गों, विद्यार्थियों और वन्यजीवों पर भी ध्वनि प्रदूषण के असर का उल्लेख किया।
कार्यक्रम में 'उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइस पॉल्यूशन' के कुमाऊं चैप्टर की भी घोषणा की गई, जिसका नेतृत्व सुमंथा घोष करेंगे। यह चैप्टर कॉर्बेट और आसपास के क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर कार्य करेगा।
अभियान से जुड़े लोगों ने कहा कि उनका उद्देश्य उत्तराखंड को अधिक शांत, स्वस्थ और रहने योग्य बनाने के लिए जनभागीदारी के साथ दीर्घकालिक प्रयास करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

