हिंदी आत्मसम्मान की भाषा, विज्ञान-साहित्य के समन्वय से मजबूत होगी भारत की ज्ञान परंपरा
राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिंदी के अकादमिक और रोजगारपरक विस्तार पर मंथन
हरिद्वार, 01 सितंबर (हि.स.)। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय आत्मसम्मान और ज्ञान परंपरा की भाषा है। हिंदी में विपुल साहित्य रचा गया है और इसके गौरव को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। यह बात कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने मंगलवार काे हिंदी विभाग एवं शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कही।
‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, हिन्दी भाषा-साहित्य अध्ययन की नई दिशाएं’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने हिंदी के अध्ययन को नई दिशा दी है। अब समय अंतर-अनुशासनिक अध्ययन का है, जिसमें विज्ञान और साहित्य के समन्वय के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपरा को और मजबूत किया जा सकता है।
स्वामी दयानंद और आर्य समाज ने हिंदी को दी नई पहचान
समविश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि स्वामी दयानंद और आर्य समाज ने हिंदी को प्राण-प्रतिष्ठा प्रदान की। गुरुकुल के स्नातक हिंदी के ध्वजवाहक बने हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. सुहास ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठियां बौद्धिक विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच हैं। ऐसे आयोजनों से विषय की नवीन प्रवृत्तियों की जानकारी मिलती है और शोध एवं नवाचार को नई दिशा मिलती है।
रोजगार की भाषा के रूप में बढ़ रही हिंदी की संभावनाएं
मुख्य वक्ता डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी कौशल की भाषा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चलते हिंदी के अकादमिक उन्नयन के नए रास्ते खुले हैं। हिंदी अब रोजगार की भाषा के रूप में भी अपनी संभावनाओं का विस्तार कर रही है।
विशिष्ट वक्ता डॉ. विपिन शर्मा ने हिंदी साहित्य को समाज विज्ञान की विभिन्न दृष्टियों से देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूमंडलीकरण के बाद हिंदी साहित्य में अनेक नए विमर्श सामने आए हैं, जिन्होंने नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. मुदिता अग्निहोत्री ने स्वागत वक्तव्य दिया, जबकि संचालन डॉ. अजित तोमर ने किया।
महर्षि दयानंद सभागार, संस्कृत विभाग में आयोजित संगोष्ठी में देशभर से करीब 150 प्रतिभागियों ने हाईब्रिड माध्यम से सहभागिता की और विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डॉ. निशा शर्मा, डॉ. निशा यादव, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. मोहनी कुमार, डॉ. रोशनलाल, डॉ. श्वेता अग्रवाल और डॉ. वंदना सिंह सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

