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वृक्ष सभी रूपों में देवता के समान, प्रकृति का दोहन मानवता के लिए खतरा

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वृक्ष सभी रूपों में देवता के समान, प्रकृति का दोहन मानवता के लिए खतरा


हरिद्वार, 21 जुलाई (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग में स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी वर्ष के अवसर पर बायोप्रोस्पेक्टिंग भारतीय जातीय जीवविज्ञान की संपत्ति और वैदिक सूक्ष्मजीव विज्ञान विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

समविश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि बैक्टीरिया एक ओर रोग उत्पन्न करते हैं, तो दूसरी ओर औषधि निर्माण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कोविड-19 काल का उदाहरण देते हुए विज्ञान और प्रकृति के संतुलित उपयोग पर बल दिया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि ष्वृक्ष सभी रूपों में देवता के समान हैं। उन्होंने प्रकृति के बढ़ते दोहन पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो मानव स्वयं अपने अस्तित्व के लिए संकट खड़ा कर देगा। उन्होंने वैदिक ऋचाओं का उल्लेख करते हुए प्रकृति, वनस्पतियों और समस्त जीव-जंतुओं के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली के निदेशक प्रो. रामलखन सिंह सिकारवार ने फूलों, क्लोरोफिल, परागण और कीटों की भूमिका के माध्यम से जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। वहीं विभिन्न वैज्ञानिकों ने शोध पत्र प्रस्तुत कर विज्ञान की विभिन्न विधाओं पर अपने विचार साझा किए।

अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. सुहास ने बताया कि विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों और परियोजनाओं पर व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है, जिससे युवा शोधार्थियों को नए अवसर मिलेंगे।

कार्यक्रम में अतिथियों को अंगवस्त्र एवं औषधीय पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं बीएससी-एमएससी के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कल्पना सागर व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संदीप कुमार ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला