नंदा राजजात : जा मेरी गौरा जा, तू शिव का कैलाश
गोपेश्वर, 11 सितम्बर (हि.स.)। जा मेरी गौरा जा, तू शिव का कैलाश...लोकगीतों और जागरों के बीच शुक्रवार को बंड पट्टी से मां नंदा की डोली को कैलाश के लिए विदा किया गया। मायके से विदाई के समय ध्याणियां भावुक हो उठीं और कई महिलाएं फफककर रो पड़ीं।
मां नंदा की बड़ी जात के तहत बीते एक सप्ताह से डोलियां अपने अगले पड़ावों की ओर बढ़ रही हैं। शुक्रवार को बंड की नंदा डोली गौणा, बधाण की डोली चेपड़ो और दशोली-कुरुड़ की नंदा डोली ल्वाणी पहुंची। डोलियों के स्वागत और दर्शन के लिए विभिन्न पड़ावों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे।
बंड की नंदा डोली कोंटा-किरूली स्थित भूमियाल मंदिर से पंछूला, भौंधार और भनाई होते हुए गौणा के लिए रवाना हुई। बंड क्षेत्र की 12 ग्राम सभाओं से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डोली को विदाई दी। बंड भूमियाल और गेंदाणु देवता की छंतोलियां भी नंदा डोली के साथ कैलाश के लिए रवाना हुईं। श्रद्धालुओं ने मां नंदा को खाजा-चूड़ा, बिंदी, चूड़ी, ककड़ी और मुंगरी समेत विभिन्न समौण अर्पित किए। बधाण की नंदा डोली सूना से राड़ीबगड़ और थराली होते हुए चेपड़ो पहुंची। वहीं दशोली-कुरुड़ की डोली सेमा, भौंधार और चरबंग होते हुए ल्वाणी पहुंची। पड़ावों पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ डोलियों का स्वागत किया।
विदाई के दौरान पुजारी अशोक गौड़, भूमियाल मंदिर के पुजारी नरेंद्र खाती, गेंदाणु पुजारी जगत सिंह नेगी, बंड मंदिर समिति अध्यक्ष जगत सिंह नेगी, सचिव रघुनाथ सिंह फर्स्वाण, संरक्षक शंभू प्रसाद सती, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अयोध्या प्रसाद हटवाल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / जगदीश पोखरियाल

