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दूषित पेयजल मामले में हाई कोर्ट सख्त, मुख्य सचिव से मांगा जवाब

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दूषित पेयजल मामले में हाई कोर्ट सख्त, मुख्य सचिव से मांगा जवाब


- ज्यूलिकोट में करीब 200 लोगों के बीमार होने और दो मौतों का मामला, अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी जारी रहेगी

नैनीताल, 15 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल के ज्यूलिकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से करीब 200 लोगों के बीमार होने और दो लोगों की मौत के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी समाप्त करने से इनकार करते हुए इसे जारी रखने के निर्देश दिए।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की जांच और निगरानी के लिए गठित समिति में जल संस्थान, जल निगम, स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य संबंधित विभागों को भी शामिल करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

सुनवाई के दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी ने अदालत को बताया कि 20 अगस्त को क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप सामने आया था। जल संस्थान की प्रयोगशाला में पेयजल की जांच कराई गई थी। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पानी के नमूने बाहरी प्रयोगशालाओं में भी भेजे गए। अब तक प्राप्त 10 जांच रिपोर्टों में पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

जिलाधिकारी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है और लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। उन्होंने पानी में दूषित तत्व पाए जाने की पुष्टि होने की जानकारी भी अदालत को दी। जरूरत पड़ने पर बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाने की बात भी कही गई।

वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि दस स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों की जांच में गुणवत्ता मानकों में कमी पाई गई है। कुछ स्थानों पर पानी के मानव मल से, जबकि कुछ अन्य स्थानों पर पशुओं के मल-मूत्र से दूषित होने की पुष्टि हुई है।

अदालत के निर्देश के बाद पीसीबी ने 20 से अधिक स्थानों से पानी के नमूने लिए थे। इनमें से अब तक प्राप्त 10 रिपोर्टों में पानी दूषित पाया गया है। इससे पहले जल संस्थान की प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता ठीक बताई गई थी।

खंडपीठ के आदेश के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में करीब 200 मामले सामने आए हैं। इनमें 131 मामले पीलिया/जॉन्डिस और 88 मामले हेपेटाइटिस-ए से संबंधित बताए गए हैं। कोर्ट ने दूषित पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान और जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित विभागों को समन्वय से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / लता