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पतंजलि और एम्स ऋषिकेश के बीच समझौता, आयुर्वेद व आधुनिक चिकित्सा पर होगा संयुक्त शोध

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पतंजलि और एम्स ऋषिकेश के बीच समझौता, आयुर्वेद व आधुनिक चिकित्सा पर होगा संयुक्त शोध


हरिद्वार, 09 जुलाई (हि.स.)। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को एक मंच पर लाने की दिशा में एक अभिनव पहल हुई है। पतंजलि अनुसंधान संस्थान, पतंजलि विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के बीच क्लिनिकल रिसर्च और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते के तहत तीनों संस्थान मिलकर क्लिनिकल स्टडीज़, वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक सहयोग और स्वास्थ्य विज्ञान में नवाचार पर काम करेंगे। साथ ही शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और चिकित्सकों का आपसी आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा की संयुक्त क्षमताओं का उपयोग कर रोगियों के लिए साक्ष्य-आधारित उपचार विकसित करना है

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद गुरुवार को पतंजलि योगपीठ के महासचिव आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। यह भारत में एक ऐसे समन्वित स्वास्थ्य मॉडल को सशक्त बनाएगी जिसमें पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियां एक-दूसरे की पूरक बनकर कार्य करेंगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त क्लिनिकल अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रमाणों के माध्यम से जनस्वास्थ्य के लिए अधिक प्रभावी समाधान दिए जा सकेंगे।

एम्स ऋषिकेश की निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. मीनू सिंह ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान के बीच वैज्ञानिक संवाद वर्तमान समय की आवश्यकता है। यह समझौता क्लिनिकल रिसर्च, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा। उन्हें विश्वास है कि संयुक्त अनुसंधान से ऐसे वैज्ञानिक प्रमाण मिलेंगे जो रोगियों के उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाएंगे।

इस अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल ने बताया कि समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेंगे। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और चिकित्सकों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण एवं एक्सचेंज प्रोग्राम भी चलाए जाएंगे।

एम्स ऋषिकेश के डीन रिसर्च प्रो. शैलेंद्र हांडू ने कहा कि यह सहयोग समग्र स्वास्थ्य की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। वहीं पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि यह समझौता युवा शोधकर्ताओं और डेटा-आधारित रिसर्च के लिए सशक्त मंच देगा। दोनों संस्थानों के विशेषज्ञों का सहयोग अंतरराष्ट्रीय मानकों का उच्च गुणवत्ता वाला शोध करेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला