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हरिद्वार में ग्राम स्तर पर ‘मिनी सचिवालय’ व्यवस्था शुरू

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हरिद्वार में ग्राम स्तर पर ‘मिनी सचिवालय’ व्यवस्था शुरू


हरिद्वार, 20 अप्रैल (हि.स.)। जनपद हरिद्वार में आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण और अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में अब ग्राम पंचायत स्तर पर ही लोगों की समस्याएं सुनी और सुलझाई जाएंगी। इसके लिए जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय स्थापित किए गए हैं, जिन्हें वर्चुअल माध्यम से जिला मुख्यालय से भी जोड़ा गया है।

इस नई व्यवस्था का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर जीर्ण-शीर्ण पंचायत भवनों का पुनर्निर्माण कर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से युक्त मिनी सचिवालय के रूप में विकसित किया गया है।

देश में पहली बार, पंचायत स्तर पर वर्चुअल जनसुनवाई

हरिद्वार देश का पहला जनपद बन गया है, जहां ग्राम स्तर पर जनसुनवाई को वर्चुअल प्लेटफॉर्म से जिला स्तर की जनसुनवाई से जोड़ा गया है। अब प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में ग्रामीण अपने-अपने गांव के मिनी सचिवालय से ही जुड़कर सीधे जिलाधिकारी के समक्ष अपनी समस्या रख सकेंगे। इस पहल से ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी और समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

25 मिनी सचिवालयों की स्थापना

जनपद में कुल 25 मिनी सचिवालय स्थापित किए गए हैं। ब्लॉकवार बहादराबाद 08, भगवानपुर 03, रुड़की 05, नारसन 05, लक्सर 03 व खानपुर 01 में एक बनाया गया है।

इन सभी केंद्रों पर ग्राम प्रधान प्रत्येक सोमवार को ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे और उन्हें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाकर समाधान सुनिश्चित करेंगे।

जनसुनवाई में आईं 42 शिकायतें, आधी का मौके पर समाधान

जिला कार्यालय सभागार में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 42 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 21 समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को त्वरित निस्तारण के लिए भेजा गया। जनसुनवाई में राजस्व, भूमि विवाद, विद्युत, एलपीजी गैस, अतिक्रमण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए।

जनसुनवाई में कई गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए गए, जिनमें विष्णु विहार कॉलोनी में बिजली कनेक्शन न होने से लोगों की परेशानी। सोहलपुर निवासी द्वारा लापता पिता की तलाश के लिए गुहार। दाबकी कला में वर्ष 2003 से लंबित चकबंदी प्रक्रिया। कनखल क्षेत्र में भूमि पैमाइश का मामला। किसानों की फसल को नुकसान और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण

गंगा क्षेत्र में अवैध कब्जा हटाने की मांग प्रमुख रहे। इन सभी मामलों पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में स्थलीय निरीक्षण की आवश्यकता है, वहां संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी पी.आर. चौहान, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार हल्दियानी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में फरियादी मौजूद रहे।

यह पहल न केवल प्रशासन को गांवों के करीब लाने का काम करेगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत बनाएगी। मिनी सचिवालयों के माध्यम से जनसुनवाई की यह व्यवस्था भविष्य में अन्य जनपदों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला