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वाल्मीकि धाम दिल्ली के पीठाधीश्वर कृष्णा शाह नंद गिरी को जूना अखाड़े ने दी जगतगुरु की उपाधि

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वाल्मीकि धाम दिल्ली के पीठाधीश्वर कृष्णा शाह नंद गिरी को जूना अखाड़े ने दी जगतगुरु की उपाधि


हरिद्वार, 23 जुलाई (हि.स.)। श्री पंच दश नाम जूना अखाड़े में आयोजित एक भव्य समारोह में अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने वाल्मीकि अखाड़े के गठन की घोषणा करते हुए दिल्ली स्थित वाल्मीकि धाम के पीठाधीश्वर कृष्णा शाह विद्यार्थी नंद गिरी महाराज को जगतगुरु की उपाधि से विभूषित किया।

इससे पूर्व हरिहर आश्रम कनखल में आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने अखाड़े की परंपरा के अनुरूप कृष्णानंद गिरी महाराज का अनुष्ठान कर अभिषेक किया और उन्हें जगतगुरु बनाए जाने की जूना अखाड़े की तरफ से घोषणा की। उन्होंने विश्वास प्रकट किया कि जगतगुरु महाराज सनातन धर्म की उन्नति प्रगति व विकास के लिए समाज के सभी वर्गों को प्रेरित करने के लिए कार्य करेंगे।माया देवी मंदिर में आयोजित समारोह में अधिष्ठात्री माया देवी की पूजा अर्चना के पश्चात अखाड़े के वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज तथा आवाहन अखाड़े की श्रीमहंत विभा गिरी महाराज ने चादर ओढ़ाकर कृष्णानंद गिरी महाराज का समस्त साधु समाज और जूना अखाड़े की ओर से जगतगुरु पद पर अभिषेक किया।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी महाराज ने कहा जूना अखाड़ा सदैव से ही समाज के सभी वर्गों का सम्मान व आदर करने के साथ सभी के सहयोग से सनातन धर्म की रक्षा व उत्थान के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है। वाल्मीकि अखाड़े की स्थापना का गठन भी इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि समाज के सभी वर्ग मुख्य धारा में समाहित होकर सनातन धर्म को मजबूती प्रदान करें और भारत को जगतगुरु बनाने में सहयोग करें।

उन्होंने कहा कुंभ पर्व पर वाल्मीकि अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ शाही स्नान में शामिल होगा तथा अन्य महामंडलेश्वर की तरह उन्हें भी रथ, छत्र तथा सिंहासन प्रदान किया जाएगा।

अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने जूना अखाड़े की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पूरे विश्व में सामाजिक सौहार्द, भाईचारे का संदेश जाएगा और सभी वर्ग मिलकर सनातन धर्म की पताका पूरे विश्व में फहराएंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय महामंत्री श्री महंत महेश पुरी, श्री महंत पूर्णागिरि, श्री महंत गिरीश आनंद गिरि, महंत आनंदेश्वर गिरी महंत नीलकंठ गिरि ,महंत आदित्य गिरि, महंत भीष्म गिरी महंत मुन्ना गिरी श्री महंत देवानंद सरस्वती आदि मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला