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हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, पांच साल के बच्चों से लेकर 60 साल की महिलाओं के कंधों पर कांवड़

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हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, पांच साल के बच्चों से लेकर 60 साल की महिलाओं के कंधों पर कांवड़


हरिद्वार, 04 अगस्त (हि.स.)। सावन के पावन महीने में धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय हो चुकी है। कांवड़ मेले का उत्साह अब अपने चरम पर पहुंच गया है और गंगा घाटों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक सिर्फ ष्बोल बमष् और ष्हर-हर महादेवष् के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। आस्था का ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जहां पांच साल के मासूम बच्चों से लेकर 60 वर्ष तक की बुजुर्ग महिलाएं भी कंधों पर कांवड़ रखकर गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंच रही हैं।

प्रशासन के अनुसार, अब तक एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है। हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, मालवीय घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी हुई है। गंगाजल भरने के बाद कांवड़िए अपने-अपने राज्यों और शहरों की ओर पैदल रवाना हो रहे हैं।

महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

इस बार कांवड़ मेले की सबसे खास तस्वीर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने परिवार के साथ कांवड़ यात्रा कर रही हैं, जबकि कई महिला समूह भी शिवभक्ति में लीन होकर पैदल यात्रा करते नजर आ रहे हैं। दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आई महिलाएं कई सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भगवान शिव को जल अर्पित करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही हैं। महिला श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव में उनकी अटूट आस्था है और इसी विश्वास के साथ वे बिना किसी कठिनाई की परवाह किए यात्रा पूरी कर रही हैं।

छोटे-छोटे शिवभक्त भी पीछे नहीं

कांवड़ यात्रा में बच्चों का उत्साह भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कई बच्चे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी कांवड़ लेकर अपने माता-पिता के साथ यात्रा कर रहे हैं। कुछ बच्चे पारंपरिक बांस की कांवड़ लेकर चल रहे हैं तो कुछ दोनों ओर गंगाजल से भरी कांवड़ उठाए दिखाई दे रहे हैं। मासूम शिवभक्तों की यह श्रद्धा हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

बुजुर्गों का जोश भी युवाओं जैसा

हरिद्वार में कई बुजुर्ग महिलाएं भी कांवड़ यात्रा करती दिखाई दे रही हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनके चेहरे पर शिवभक्ति का उत्साह साफ नजर आ रहा है। यह दृश्य इस बात का संदेश दे रहा है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और आस्था की कोई उम्र नहीं होती।

हरिद्वार बना शिवभक्ति का केंद्र

धर्मनगरी इस समय पूरी तरह भगवामय नजर आ रही है। हर ओर शिवभक्त, कांवड़, भजन, डमरू और बोल बम के जयघोष वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं। कोई परिवार के साथ यात्रा कर रहा है तो कोई दोस्तों के समूह में गंगाजल लेने पहुंचा है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद पूरे मेले में उत्साह और अनुशासन का माहौल देखने को मिल रहा है।

प्रशासन का अनुमान है कि श्रावण शिवरात्रि तक पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच सकते हैं, जिससे यह कांवड़ मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक बार फिर अपनी भव्यता का परिचय देगा।

शिवरात्रि को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

8 से 11 अगस्त के बीच डाक कांवड़ और 11 अगस्त को होने वाले श्रावण शिवरात्रि जलाभिषेक को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। नागरिक पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बल, एटीएस, बम निरोधक दस्ता (बीडीएस), एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें प्रमुख घाटों, मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं।

यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए हरिद्वार में 10 ड्रोन जोन बनाए गए हैं, जबकि ऋषिकेश और नीलकंठ क्षेत्र में अतिरिक्त ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा चारधाम कंट्रोल रूम से 529 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने मार्गदर्शन और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए क्यूआर कोड भी जारी किए हैं।

कांवड़ मेले में उमड़ा यह आस्था का महासैलाब न केवल भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति को दर्शा रहा है, बल्कि हरिद्वार को एक बार फिर विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक आस्था की नगरी के रूप में स्थापित कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला