वेद-वेदांग और भारतीय संस्कृति संरक्षण पर हुआ मंथन
ज्योतिर्मठ, 13 मई (हि.स.)। श्री बदरीनाथ वेद वेदांग संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वेद-वेदांगों की प्रासंगिकता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर व्यापक चर्चा हुई।
'ज्योतिर्मठ एवं बदरीनाथ धाम की ऐतिहासिकता एवं माहात्म्य' विषयक इस संगोष्ठी का आयोजन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ और इतिहास संकलन समिति उत्तराखंड प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुन्द पाण्डेय राष्ट्रीय संगठन मन्त्री अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें वेदों और वेदांगों में निहित हैं। उन्होंने ज्योतिर्मठ की दार्शनिक परंपरा और बदरीनाथ धाम के पुराणों में वर्णित महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।
उन्होनें अपने उद्बोधन में अपनी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल देते हुए धामों की ऐतिहासिकता से भारत के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित किया और वेद एवं वेदांगों की उपयोगिता का निरूपण किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व धर्माधिकारी बदरीनाथ धाम भुवन चन्द्र उनियाल ने वेदव्यास की ओर से रचित पुराणों के अनुसार बदरीनाथ के माहात्म्य और नर-नारायण की कथा के माध्यम से धाम की ऐतिहासिकता को परिभाषित किया।
कार्यक्रम के संरक्षक सचिव संस्कृत शिक्षा परिषद् ने अपने उद्बोधन में संस्कृत शिक्षा की वर्तमान स्थिति तथा इसके विकास के उपायों को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा चमोली ने अपने सारभूत उद्बोधन में शंकराचार्य की तपस्थली ज्योतिर्मठ एवं बदरीनाथ के माहात्म्य को व्याख्यायित किया।
कार्यक्रम के सह संरक्षक के रूप में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ के प्रभारी प्राचार्य डॉ गोपाल कृष्ण उपस्थित रहें। कार्यक्रम की अध्यक्षता कबदरीनाथ वेद वेदांग संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्योतिर्मठ के प्राचार्य दर्वेश्वर थपलियाल ने विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
अतिथियों का स्वागत डॉ आशीष भट्ट, सहायक प्रवक्ता, संस्कृत महाविद्यालय तथा संचालन नवीन पन्त राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ ने किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में अरविन्द पन्त, डॉ.चरण सिंह, नन्दन सिंह रावत, कार्यालय प्रभारी रणजीत सिंह, जगदीश जोशी, धीरेन्द्र सिंह, डॉ रणजीत सिंह, प्रदीप पुरोहित, मनीष देवराडी, डॉ सावित्री रावत आदि ने अभूतपूर्व सहयोग किया। कार्यक्रम में डॉ अभिनव तिवारी, प्रान्त अध्यक्ष, इतिहास संकलन योजना, की विशेष उपस्थिति रही।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रकाश कपरुवाण

