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किसानों को बाजार से जोड़ने की पहल, आईटीबीपी के साथ स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था एक साल बढ़ी

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किसानों को बाजार से जोड़ने की पहल, आईटीबीपी के साथ स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था एक साल बढ़ी


देहरादून, 08 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड के किसानों और पशुपालकों को स्थानीय उत्पादों का सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच संचालित ‘किसान से आईटीबीपी तक एकीकृत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला’ को एक वर्ष का विस्तार दिया गया है। इसके तहत राज्य के किसानों से खरीदे जा रहे भेड़-बकरी, कुक्कुट और ट्राउट मछली जैसे उत्पादों की आपूर्ति आईटीबीपी की 14 बटालियनों को की जा रही है।

गुरुवार को यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय में पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा की मौजूदगी में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और पशुपालन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास विभाग के बीच आगामी एक वर्ष के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। समझौते पर विभाग के सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम और आईटीबीपी के उत्तरी सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक मनु महाराज ने हस्ताक्षर किए।

इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय किसानों और पशुपालकों को उनके उत्पादों के लिए स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित संस्थागत बाजार उपलब्ध कराना तथा स्थानीय उत्पादों को सुरक्षा बलों की मांग से जोड़ना है। इसके तहत किसानों द्वारा उत्पादित जीवित भेड़-बकरी, मांस के लिए पाले जाने वाले मुर्गे और ट्राउट मछली की आपूर्ति आईटीबीपी की 14 बटालियनों को की जा रही है।

अब तक आईटीबीपी को 3 लाख 56 हजार किलोग्राम जीवित भेड़-बकरी, 2 लाख 40 हजार किलोग्राम जीवित कुक्कुट तथा 56 हजार किलोग्राम ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है। इस पहल से उत्तराखंड के 450 से अधिक किसान परिवारों तथा 42 प्राथमिक सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों को संस्थागत बाजार से जोड़ा गया है।

किसानों को उनके उत्पादों का भुगतान पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने के लिए सीधे बैंक खातों में ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की गई है। अब तक किसानों के खातों में 17.02 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1.66 करोड़ रुपये, 2025-26 में 10.02 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 5.34 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

संस्थागत खरीद में भुगतान प्रक्रिया के कारण किसानों को संभावित देरी से बचाने के लिए राज्य सरकार ने 5 करोड़ रुपये की घूर्णन निधि भी स्थापित की है। इससे किसानों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने में मदद मिल रही है।

पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों और पशुपालकों को उनके उत्पादों के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना और उनकी आय के स्थायी अवसरों को मजबूत करना है। आईटीबीपी के साथ विकसित यह व्यवस्था स्थानीय उत्पादन को संस्थागत मांग से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इसे आगे और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक स्थानीय किसान और किसान संगठन इससे लाभान्वित हो सकें।

विभाग के सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि इस पहल के माध्यम से स्थानीय उत्पादन और संस्थागत मांग के बीच प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला विकसित हुई है। किसानों को बाजार मिलने के साथ सुरक्षा बलों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। आगामी एक वर्ष में इस व्यवस्था को और मजबूत करने तथा अधिक किसानों एवं किसान संगठनों को इससे जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

आईटीबीपी के साथ स्थापित इस आपूर्ति व्यवस्था के आधार पर भारतीय सेना और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के चयनित चौकियों एवं प्रतिष्ठानों को भी मांग के आधार पर स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति शुरू की गई है। इससे स्थानीय किसानों के लिए संस्थागत बाजार का दायरा और व्यापक हुआ है।

राज्य सरकार के अनुसार, समझौते के एक वर्ष के विस्तार का उद्देश्य किसान-केंद्रित आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करना, स्थानीय किसानों एवं पशुपालकों की भागीदारी बढ़ाना और सुरक्षा बलों की मांग के अनुरूप स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति का विस्तार करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय