बारिश से गढ़वाल घाटी में वायु गुणवत्ता में सुधार, वायु गुणवत्ता सूचकांक भी हुआ बेहतर
देहरादून, 16 मार्च (हि.स.)। गढ़वाल घाटी में वायु की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वर्षा के प्रभाव से वातावरण में मौजूद धूल एवं प्रदूषक कण नीचे आ गए, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक में भी सुधार देखने को मिला। यह जानकारी हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड के भौतिकी विभाग के वैज्ञानिक व हिमालयी वातावरणीय व अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला के मुख्य अन्वेषक डॉ. आलोक सागर गौतम ने दी। इस अध्ययन में उनके शोध छात्र अंकित कुमार, अमनदीप विश्वकर्मा और सरस्वती रावत भी शामिल हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार वर्षा के बाद किए गए नवीनतम अवलोकनों में ब्लैक कार्बन का स्तर 745 नैनोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। पिछले कुछ समय से गढ़वाल घाटी में बढ़ता वायु प्रदूषण चिंता का विषय बन गया था। विशेष रूप से सुबह के समय हल्की धुंध दिखाई देने लगी थी, जिससे लोगों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही थी। वैज्ञानिकों के अनुसार घाटी में लगातार जंगलों में लग रही आग, वातावरण में बढ़ते सूक्ष्म कण, अधिक नमी तथा हवा की कम गति इस स्थिति के प्रमुख कारण रहे हैं।
डॉ. आलोक सागर गौतम के अनुसार प्रदूषण बढ़ने के दिनों में ब्लैक कार्बन का स्तर सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। उनके शोध के अनुसार सामान्य दिनों में इस क्षेत्र में ब्लैक कार्बन का स्तर लगभग 2000 से 5000 नैनोग्राम प्रति घन मीटर के बीच रहता है, जबकि हाल के दिनों में यह बढ़कर 9000 से 10,000 नैनोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया था। यह स्तर पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अत्यधिक माना जाता है और यह संकेत देता है कि वातावरण में धुएं जैसे अत्यंत सूक्ष्म कणों की मात्रा तेजी से बढ़ रही है।
हिमालयी वातावरणीय और अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला के स्थलीय अवलोकनों तथा उपग्रह आंकड़ों के आधार पर जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 के दौरान वायुमंडलीय प्रदूषण और मौसम संबंधी परिस्थितियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
वैज्ञानिकों के अनुसार वर्षा (बारिश) वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्षा होने पर वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक कण वर्षा की बूंदों के साथ नीचे आ जाते हैं, जिससे हवा अपेक्षाकृत स्वच्छ हो जाती है। यदि आने वाले दिनों में क्षेत्र में हल्की या मध्यम वर्षा होती है, तो वायु गुणवत्ता में और सुधार होने की संभावना है तथा सुबह दिखाई देने वाली धुंध भी कम हो सकती है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि गढ़वाल घाटी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना, वाहनों के धुएं को नियंत्रित करना, अनियंत्रित कचरा और बायोमास जलाने से बचना, धूल नियंत्रण उपाय अपनाना तथा वनाग्नि प्रबंधन को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि घाटी के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

