home page

बिना अनुमति संचालित मस्जिद व मदरसा भवन सील

 | 
बिना अनुमति संचालित मस्जिद व मदरसा भवन सील


देहरादून, 01 जून (हि.स.)। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने बिना आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के आराेप में डोईवाला तहसील के ग्राम कण्डोगल कुडियाल (थानों) स्थित एक मस्जिद एवं मदरसा भवन सील कर दिया है।

एमडीडीए के अनुसार भवन में बिना आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के धार्मिक एवं शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। भवन के प्रथम और द्वितीय तल पर मस्जिद का संचालन किया जा रहा था, जबकि परिसर में मदरसा भी चल रहा था। जांच के दौरान संबंधित पक्ष आवश्यक विभागीय अनुमतियां, पंजीकरण और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। प्राधिकरण ने बताया कि भवन के खिलाफ पहले भी चालान की कार्रवाई की गई थी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कई अवसर दिए गए थे।

प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक भवन के प्रथम तल को 17 दिसंबर 2025 को सील किया गया था। इसके बाद जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से इमामों के आवास की व्यवस्था का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा गया था। मानवीय आधार पर राहत देते हुए एमडीडीए ने उत्तराखण्ड वक्फ बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), उत्तराखण्ड मदरसा शिक्षा परिषद से पंजीकरण एवं मान्यता संबंधी अभिलेख सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मामले की सुनवाई के लिए जनवरी और फरवरी 2026 में तिथियां भी निर्धारित की गईं, लेकिन निर्धारित समय में अपेक्षित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। निरीक्षण के दौरान भवन परिसर में मदरसे का संचालन जारी पाया गया। एमडीडीए का कहना है कि नोटिस, सुनवाई और पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद नियमों का अनुपालन नहीं किया गया। इसके बाद 27 मई 2026 को भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपूर्ण चालानशुदा अवैध निर्माण को सील कर दिया गया।

कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता प्रमोद मेहरा, अवर अभियंता दीपक नौटियाल, नायब तहसीलदार डोईवाला राजेन्द्र सिंह रावत, रानीपोखरी थाना पुलिस तथा अन्य अधिकारी मौजूद रहे। क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय विशेष को लक्षित करना नहीं, बल्कि कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष को नियमानुसार नोटिस, सुनवाई का अवसर और अतिरिक्त समय भी दिया गया, लेकिन आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।

प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 के तहत यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में सभी निर्माण कार्यों और संस्थानों का संचालन वैधानिक स्वीकृतियों के अनुरूप होना अनिवार्य है तथा भविष्य में भी अवैध निर्माणों और अनधिकृत गतिविधियों के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय