एआई से 2030 तक 17 करोड़ नए रोजगार अवसर, विशेषज्ञों ने बताया भविष्य के नेतृत्व का मंत्र
काशीपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को रोजगार के लिए चुनौती के साथ-साथ नए अवसरों के बड़े स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। आईआईएम काशीपुर में आयोजित प्रबंधन सम्मेलन ‘दिशा 2026’ में उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने कहा कि एआई और डेटा आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के बीच 2030 तक जहां करीब नौ करोड़ नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, वहीं लगभग 17 करोड़ नए रोजगार अवसर भी पैदा होने का अनुमान है।
सम्मेलन में नीनओपल इंक, बीएनवाई, पीआईपी ग्लोबल, एचटी मीडिया ग्रुप, निवेशन टेक्नोलॉजीज, डीएस ग्रुप, वेदांता रिसोर्सेज, मेकमायट्रिप और अदाणी ग्रुप के वरिष्ठ पेशेवरों ने बदलते कारोबारी परिदृश्य, एआई एकीकरण, रणनीतिक नवाचार और भविष्य की नेतृत्व क्षमता पर विचार साझा किए।
विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले दौर में केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं होगी। पेशेवरों को अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ तकनीक की समझ, जिज्ञासा, क्रॉस-फंक्शनल लर्निंग और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। संगठनों को भी पारंपरिक कारोबारी मॉडलों का समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन कर बदलती बाजार जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
सम्मेलन की शुरुआत ‘पुरानी व्यवस्था पर विचार : जब सब कुछ सही चल रहा हो, तब संगठनों को बदलाव कब करना चाहिए?’ विषय पर पैनल चर्चा से हुई। विशेषज्ञों ने परिचालन स्थिरता और रणनीतिक नवाचार के बीच संतुलन, कार्यबल के अनुकूलन तथा डिजिटल बुनियादी ढांचे और डेटा-संचालित प्रणालियों के प्रभाव पर चर्चा की।
नीनओपल इंक. के वरिष्ठ एसोसिएट कंसलटेंट ध्रुव चौधरी ने कहा कि क्रॉस-फंक्शनल लर्निंग के माध्यम से किसी उत्पाद का विशेषज्ञ होना ही जरूरी नहीं है, बल्कि उसकी सही पोजिशनिंग की समझ भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार एआई के कारण 2030 तक नौ करोड़ नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जबकि 17 करोड़ नए रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं।
बीएनवाई की वैश्विक प्रमुख (डेटा एंड एनालिटिक्स मैनेज्ड सर्विसेज) करिश्मा सिंगला ने कहा कि आज के दौर में तकनीक की समझ के साथ अपने डोमेन में विशेषज्ञता भी जरूरी है। उनके अनुसार अनुभव निर्णय लेने में मदद करता है, जबकि जिज्ञासा व्यक्ति को पुरानी सोच और कार्यशैली से बाहर निकलकर लगातार सीखने के लिए प्रेरित करती है।
दूसरे पैनल में ‘बाजार में पिछड़ने से पहले लाएं सकारात्मक परिवर्तन : बदलते बाजार परिदृश्य में बढ़त बनाए रखने के उपाय’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें बिक्री, विपणन, तकनीक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि कंपनियों को बाजार में आने वाले बदलावों का पहले से आकलन कर अपनी रणनीति में समय रहते परिवर्तन करना होगा।
मेकमायट्रिप के सूचना प्रौद्योगिकी उपाध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने कहा कि बाजार में आने वाले व्यवधानों को केवल चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि विकास और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता व्यवहार और प्राथमिकताओं का विश्लेषण कर कंपनियां बाजार में होने वाले बदलावों के शुरुआती संकेत हासिल कर सकती हैं।
अदाणी एंटरप्राइजेज जीसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर दसामंथराव ने कहा कि किसी भी बाजार व्यवधान के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं। सफल नेतृत्व के लिए बदलाव का पूर्वानुमान, लचीलापन और दक्षता के साथ वैकल्पिक रणनीति तैयार रखना जरूरी है।
वेदांता लिमिटेड निकोमेट के मुख्य विपणन अधिकारी हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि ग्राहकों की अपेक्षाएं अब सामान्य उत्पादों के बजाय अधिक अनुकूलित उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने स्टार्टअप और बड़ी कंपनियों के बीच सहयोग तथा ई-कचरा पुनर्चक्रण और बैटरी आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया।
पीआईपी ग्लोबल के ऑपरेशंस हेड पराग पुल्लीवार, एचटी मीडिया ग्रुप की मुख्य राजस्व अधिकारी स्वाति शारदा, निवेशन टेक्नोलॉजीज इंडिया के कंसल्टेंट क्षितिज सबलानिया और डीएस ग्रुप के सेल्स उपाध्यक्ष अमित खन्ना ने भी बदलती बाजार परिस्थितियों में नवाचार, आपूर्ति शृंखला, मानव संसाधन और बाजार संकेतों को समय रहते समझने की जरूरत पर विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में पैनल सदस्यों और प्रबंधन शोधकर्ताओं के बीच प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। सम्मेलन के माध्यम से आईआईएम काशीपुर ने अकादमिक ज्ञान और उद्योग जगत के व्यावहारिक अनुभवों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया। विशेषज्ञों के विचारों ने विद्यार्थियों को तकनीकी बदलावों के बीच भविष्य की नेतृत्व भूमिकाओं के लिए आवश्यक कौशल और दृष्टिकोण समझने का अवसर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

