(अपडेट) विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएंगे युवा आईएफएस अधिकारी : भूपेंद्र यादव
- भारतीय वन सेवा के 111 परिवीक्षार्थी पास आउट
देहरादून, 01 अगस्त (हि. स.)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के युवा अधिकारी ऐसे समय सेवा में प्रवेश कर रहे हैं, जब देश विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवप्रशिक्षित अधिकारी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में वर्ष 2024 बैच के भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्री यादव ने शनिवार को 109 भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों और भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों को प्रशिक्षण पूर्ण होने पर प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए।
उन्होंने कहा कि आईजीएनएफए देश की प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक है, जहां अधिकारियों को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नेतृत्व, प्रशासन और निर्णय क्षमता का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वन अधिकारियों के समक्ष जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के संरक्षण, वनाग्नि, मरुस्थलीकरण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन जैसी अनेक जटिल चुनौतियां होंगी। इनसे निपटने के लिए वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता का समन्वय आवश्यक होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रिमोट सेंसिंग, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे आधुनिक उपकरण वन प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकते हैं, लेकिन तकनीक का उद्देश्य केवल आंकड़ों का संग्रह और विश्लेषण नहीं होना चाहिए। इसका उपयोग मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान विकसित करने में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सफल लोकसेवक की पहचान उसके उच्च नैतिक मूल्यों, ईमानदारी, कार्यकुशलता और सीमित संसाधनों में अधिकतम परिणाम देने की क्षमता से होती है। अधिकारियों को प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ संवेदनशीलता, त्याग, करुणा और समाज को प्रेरित करने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। श्री यादव ने कहा कि 'एक अच्छा अधिकारी वही है, जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो।' उन्होंने अधिकारियों से आत्ममूल्यांकन और आत्मबोध को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक अधिकारी की कार्ययात्रा अलग होगी और उन्हें अपने अनुभवों से निरंतर सीखते हुए राष्ट्र और समाज की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देना चाहिए।
इससे पूर्व आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया ने संस्थान का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 1938 में स्थापित यह संस्थान देश में वन सेवा प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों के साथ-साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों ने भी यहां प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप संशोधित पाठ्यक्रम पर आधारित 20 माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में 109 भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों और भूटान के दो प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर ऑनर्स डिप्लोमा अर्जित किया।
डॉ. खजूरिया ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षीय अध्ययन के साथ वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, आधुनिक प्रौद्योगिकी और नेतृत्व विकास पर विशेष बल दिया गया। कुल प्रशिक्षण अवधि का लगभग 45 प्रतिशत भाग देश के विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों में आयोजित क्षेत्रीय अभ्यास, अध्ययन भ्रमण और साहसिक गतिविधियों के लिए निर्धारित रहा।
प्रशिक्षुओं ने विशेष वैकल्पिक पाठ्यक्रम, स्वतंत्र शोध और वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक अध्ययनों में भी भाग लिया, जिसमें देश के प्रमुख संस्थानों और विशेषज्ञों का सहयोग मिला। उन्होंने नवप्रशिक्षित अधिकारियों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और वनाश्रित समुदायों की आजीविका के संवर्धन के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न पदक एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। राजस्थान संवर्ग की प्रतीक्षा नानासाहेब काले बैच की टॉपर रहीं।
दीक्षांत समारोह में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी) के अध्यक्ष सी.पी. गोयल, अपर वन महानिदेशक संतोष तिवारी, अपर वन महानिदेशक रमेश कुमार पाण्डेय, अपर सचिव अमनदीप गर्ग, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की महानिदेशक कंचन देवी, आईजीएनएफए के अपर निदेशक एन.सी. सरवणन, भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. जी.एस. भारद्वाज, वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के निदेशक सहित मंत्रालय, विभिन्न वानिकी संस्थानों एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, 2025 बैच के प्रशिक्षु, सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी और बड़ी संख्या में पास आउट अधिकारियों के परिजन उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

